Followers

Monday, 7 May 2018

हरियाणा - बेरोजगारी , महंगाई , मजहब और नमाज



हरियाणा भारत देश की 10 लोकसभा सीट वाला राज्य। 1966 से पहले पंजाब का हिस्सा। 1947 से  पहले संयुक्त पंजाब का हिस्सा। भारत की कुल जमीन का एक दशमलव चार फीसदी के आसपास जमीन हरियाणा के हिस्से आती है। ढाई करोड़ के आस पास की आबादी।   ढाई करोड़ में से 91 फीसदी के आस पास  आबादी हिन्दू और सिखों की है। सिख 4 फीसदी , हिन्दू 87 फीसदी। बाकी बची 9 फीसदी आबादी में 7 फीसदी आबादी मुस्लिम है जिसमें से अधिकांश नूह और मेवात के इलाके में रहते है। नूह और मेवात नेशनल कैपिटल रीजन के दो बड़े शहरों फरीदाबाद और गुड़गांव को जोड़ने वाला इलाका। फरीदाबाद और गुड़गांव हरियाणा के दो सबसे कमाने वाले शहर। आई टी हब , ऑटो हब ,और पता न क्या क्या हब। नूह और मेवात हरियाणा का शायद सबसे पिछड़ा हुआ इलाका। मेवात से कुछ किलोमीटर दूर जमीन करोड़ों में मेवात में कुछ भी नहीं। राजनीति किस तरह हमारे जीवन को प्रभावित करती है नूंह और मेवात इसका जीता जागता उदारहण है। पिछले साल इसी नूंह मेवात के ही एक गाँव के कुछ लोगों को प्रसासन ने खुले में शौच जाने के लिए गिरफ्तार कर लिया था और एक पुलिस अफसर ने उनकी फोटो अपने फेसबुक अकाउंट पर भी डाल दी थी उन्हें अपराधियों की तरह गिरफ्तार करके बिठाया हुआ था। उस गाँव में जब  हम गए थे तो पता चला कि सफाई का हाल गाँव में ही बहुत बुरा था। कीचड़ से भरी हुई कच्ची गलियां थी। अधिकतर गाँव वाले गुड़गांव जाकर मजदूरी करते थे। माली हालत बहुत ख़राब थी। घर पर शौचालय बनाने की बात कौन करे रसोई के लिए ही जगह नहीं थी।बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसता मेवात में खुले में शौच जाने के लिए गिरफ्तारी हुई।

पिछले हफ्ते की खबर है कि गुड़गांव में पार्क में नमाज पढ़ते लोगों को रोका गया। सीएम मनोहर लाल खटटर ने बयान दिया कि नमाज को मस्जिद के अंदर पढ़ा जाए। पार्क में नमाज पढ़ना ग़लत है इससे तनाव फैलता है। मनोहर लाल खटटर २०१४ में हरियाणा के सीएम बने थे। भाजपा के हरियाणा में पहले मुख्य मंत्री। काफी समय अपनी जिंदगी का इन्होने स्वयं सेवक बन कर बिताया है। मैंने 2014 से पहले कभी अपने शहर या गांव में कोई शाखा नहीं देखी। पिछले साल हिसार के क्रांतिमान पार्क में देखी थी सुबह सुबह शाखा लगी हुई थी। सुना है पार्कों में या खुली जगहों पर स्वयं सेवक शाखाएं लगाते रहते  है। उन शाखाओं में क्या सिखाते है ये बात जानने  के लिए शाखा में जाने की जरूरत नहीं है उनके नेताओ के बोल बचनों से ही पता लग सकता है। पार्क या किसी भी सार्वजानिक स्थल पर क्या करना चाहिए क्या नहीं इसके लिए किसी रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं है आप में अगर बेसिक डेमोक्रेसी की समझ है तो आप आसानी से तय कर सकते है कि आपको पार्क में क्या करना है और क्या नहीं ? नमाज एक शांतिप्रिय प्राथना है जिससे किसी भी दूसरे नागरिक को कोई परेशानी नहीं होती। पार्क जनता की सुविधा के लिए होता है। जब तक आप दुसरो की सुविधा में खलल नहीं डालते आप पार्क का इस्तेमाल कर सकते है। मैट बिछाकर आप योगा कर रहे है या नमाज पढ़ रहे है या रोमांस कर रहे है किसी को क्या दिक्कत होनी चाहिए ? कुछ भी नहीं। दिक्कत की बात  है जब आप वहां जोर जोर से चिल्लाते है। या ऊँचे स्वर में गाना गाने लगते है।  लाऊड स्पीकर लगाते है। बहुत सरल सी बात है।

पर सरल बात उतनी सरल नहीं दिखती जब दिमाग में जाले लगे हो। हरियाणा में 2014 में बीजेपी की सरकार आने से पहले हमेशा तथाकथित सेक्युलर पार्टियों की सरकार रही है पर नूंह मेवात की बदहाली कभी मुद्दा नहीं बनी। क्यों देश की राजधानी के पास एक जगह को बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा गया ? गुड़गांव में साल में एक या दो बार विशेष अवसर पर आसपास के मुसलमानो को नेशनल हाइवे पर नमाज अदा करने की परमिशन दी जाती है। कोई बड़ी बात नहीं थी कि ऐसे अवसरों पर उन्हें कोई भी जगह नमाज के लिए दे दी जाती। हाई वे को नमाज के लिए रोकने का कोई सेन्स नहीं बनता। ऐसी रियायतों को हिन्दू संगठन तुष्टिकरण का नाम देते है। कोई पूछने वाला हो हाई वे पर नमाज पढ़ने देने से गरीब जनता का क्या भला हो गया ? आपने उनको बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा। उनके बच्चो की शिक्षा , सेहत , रोजगार कभी मुद्दा नहीं बनता। सालो साल वो लोग बदहाली की जिंदगी बशर करते है। मुद्दा नमाज बनता है ये मुद्दे कौन छोड़कर गया तथाकथित तुष्टिकरण करने वाली पार्टियां। उस तुष्टिकरण से मेहनतकश अवाम को मिला क्या ? मुजफरनगर , गुजरात। हरियाणा में भी यही सब हो तो कोई  आश्चर्य की बात नहीं है । मनोहर लाल कह रहे है कि पार्कों में नमाज अदा होकर मस्जिद में होनी चाहिए। यही मनोहर लाल दो दिन पहले कह रहे थे कि सबको रोजगार नहीं मिल सकता। सब अपना रोजगार खुद ढूंढो। मुख्यमंत्री को जनता के रोजगार की बजाय 7 फीसदी आबादी की नमाज सार्वजानिक स्थल में करना ज्यादा महत्वपूर्ण मुद्दा लगता है। प्रदेश की 91 फीसदी आबादी को भी बेरोजगारी से बड़ा मुद्दा  यह लगता है कि अल्प संख्यक नमाज कहाँ कर रहा है। 91 फीसदी के अंदर यह डर बिठाया जा रहा है कि 7 फीसदी लोग नमाज पढ़कर उनकी जमीन पर कब्ज़ा कर लेंगे। अफवाहों और झूठ का कितना बड़ा दौर चला होगा जनता को इस तरह बरगलाने के लिए। सबसे ज्यादा शिकार पढ़ी लिखी आबादी है जो अपने से ज्यादा होशियार किसी को नहीं समझती। सारी सारी रात बीच सड़क पर माता के जागरण के नाम पर हंगामा करने वाले नमाज के नाम पर इतने चिंतित नजर आते है कि मानो डेमोक्रेसी तुष्टिकरण के भेंट चढ़ गयी हो। इसी चिंता में उन्हें न पेट्रोल डीजल के बढ़ते दामों से फर्क पड़ता है ना बढ़ रही बेरोजगारी से। क्या इनको कोई समझा सकता है कि किसी के नमाज पढ़ने या ना पढ़ने देने से उनकी जिंदगी में क्या फर्क आ जायेगा ? पार्क में कोई नमाज पढ़े या रोमांस करे इससे आपकी सेहत पर फर्क क्यों पढ़ना चाहिए। चाणक्य ने नहीं तो किसी और महापुरष ने कहा होगा कि राजा को बिना किसी  टेंशन के राज करना है तो जनता को बिना बात की अफवाहों और अंध विश्वास में उलझाए रखो। सरकार इस सलाह को  पूरे तन मन धन से अम्ल में ला रही है। देखो रोजगार  की बात मत करो हम नमाज नहीं पढ़ने दे रहे। महंगाई वहंगाई सब मिथ्या है देखो बीफ खाने वाले मारे पीटे जा रहे है। अच्छा आपके  आस पास मुसलमान नहीं रहते तो आस पास की कोई कास्ट को पकड़ लीजिये। वही आपका  हक खा रही है हम ही आपको उनसे बचाएंगे। किताबों में हमने पढ़ा था कि अंग्रेजो ने "फूट डालों और राज करो " की नीति अपना कर भारत पर दो सौ साल इस्तेमाल किया। हमारे आने वाली पीढ़ी को भी आज के  नेताओ के बारे में यही पढ़ने को मिलेगा।



No comments:

Post a Comment