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Wednesday, 2 May 2018

फेसबुक बुद्धिजीवी से वार्तालाप







- क्या लगता है अगली बार फिर भाजपा की सरकार आएगी ?

"पता है पहली बार इतनी ईमानदार सरकार बनी है कि खुद भाजपा के वर्कर कह रहे है अगली बार भाजपा को वोट नहीं देंगे। हमारे ही काम नहीं होते। "

- आप तो भाजपा को वोट देंगे ना

"हाँ हाँ मैं तो जरूर दूँगा। मेरी पेमेंट तो एक तारीख को ही हो जाती है। "

- पेमेंट ?
"नहीं वो अलग मसला है। मैं पार्टी के कार्यों के प्रसार के लिए काम करता हूँ जिसकी मुझे सैलरी मिलती है"

- आप सरकार के लिए आईटी सेल में काम करते है ?

"नहीं नहीं सरकार के लिए नहीं करता मैं भाजपा पार्टी के लिए काम करता हूँ आपको भाजपा पार्टी और सरकार में फर्क समझना होगा।"

- क्या फर्क है

"अगर आपको ये फर्क भी नहीं पता तो आप से बहस नहीं हो सकती। भारत में लोग वैचारिक रूप से शून्य है। भाजपा पार्टी और सरकार दो अलग अलग बातें है बिलकुल वैसे जैसे मेरा भाजपा के लिए जॉब करना और मेरा व्यक्तिगत रूप से मेर अपने विचार अपनी प्रोफ़ाइल पर पोस्ट करना दो अलग बाते है। मैं समझाता हूँ। आप भी पूंजीवादी सेठो के खाते सँभालते है उसकी आपको पेमेंट मिलती है और फेसबुक पर जो पोस्ट करते है उसमें और आपके काम में विरोधाभास है पर ये दो अलग बातें है।"

-यानी आप भाजपा के लिए आप काम करते है और फेसबुक पर आपके अपने विचार है।

"हाँ बिलकुल"

- भाजपा के लिए आप क्या काम करते है ?

उनके कामों की तारीफ और प्रसार

-अपनी प्रोफ़ाइल पर आपके विचार क्या करते है
"भाजपा के कामों की तारीफ और प्रसार"

दोनों में क्या फर्क हुआ ?
"आपको फर्क समझना होगा जॉब मजबूरी में की जाती है वहां भाजपा की तारीफ करना मेरी ड्यूटी है अपनी प्रोफ़ाइल पर मैं अपनी मर्जी से भाजपा की तारीफ करता हूँ क्यूँकि मुझे उनके काम पसंद है।"

-पर आप पहले तो प्रगतिशील खेमे में थे तब तो आप भाजपा की आलोचना करते थे

"हाँ तब मैं दूसरी जॉब में था"

- यानी जॉब बदलने के साथ विचार भी बदल गए ?

"देखिये विचार कोई पहाड़ नहीं है जो एक जगह खड़े रहे है विचार तो पानी है उसे अगर एक जगह रखा जाएगा तो वो सड़ जाएगा। विचारों को तो नदी की तरह होना चाहिए। गतिमान। ये एक संयोग ही है कि जॉब के साथ मेरे विचार भी बदल गए। ऐसा संयोग मेरे साथ चार बार हो चुका है"

- कितनी जॉब बदली है आपने अब तक
"चार"

-कमाल है

"है न कमाल। ये तो कुछ कमाल नहीं है कमाल तो सरकार कर रही है पता है कल ही एक सौ पाँच क्लर्कों की भर्ती हुई है अब विपक्ष वाले बेरोजगारी का रोना कैसे रोयेंगे ये देखने वाली बात है।"


- अभी आप जॉब पर है या ये आपके निजी विचार है ?

"आपने पर्सनल अटैक कर के हर्ट कर दिया मैं बहुत संवेदनशील इंसान हूँ।"

- ओह माफ़ी चाहता हूँ। ऑफकोर्स ये विचार है। खैर आप दिन भर फेसबुक पर बहस करते है कभी काम और निजी विचार आपस में नहीं टकराते? मतलब आप बहुत संवेदनशील है आपको बहुत बार फेसबुक पर ये कहते देखा है कि सामने वाला चीप पब्लिसिटी के लिए ऐसी पोस्ट कर रहा है। आप फेसबुक पर किसलिए पोस्ट करते है ?

"मैं कभी भी चीप पब्लिसिटी के लिए पोस्ट नहीं करता। पोस्ट ही करना है तो महंगी पब्लिसिटी के लिए करो। चीप पब्लिसिटी वाले सबका नुकसान कर रहे है। मैं ये मुद्दा बहुत बार उठा चुका हूँ पर कोई मानता ही नहीं सबको चीप पब्लिसिटी ही चाहिए।"

- चलिए आपसे बात कर के बहुत अच्छा लगा
"जनाब अच्छा तो सरकार कर रही है। बोलती बंद कर दी है सबकी।"

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