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Friday, 27 April 2018

अजब तेरी कारीगिरी रे सरकार।

                                               

हरियाणा सरकार ने कॉमनवेल्थ विजेताओं के सम्मान समारोह को स्थगित करना पड़ा। रेडियो ऍफ़ एम् पर सरकार के विज्ञापन आते है पांच पांच मिनट के कि ऐसी खेल नीति ला दी इस सरकार ने कि मेडल ही मेडल आ गए। जैसे इस सरकार से पहले तो हरियाणा का खेलों में कोई प्रतिनिधित्व ही नहीं था। खैर हरियाणा सरकार के विज्ञापनों की बात करेंगे तो बात जाने कहाँ चली जायेगी। पहले तो कॉमनवेल्थ और खेल नीती पर ही बात करते है। ऐसा शायद पहली बार हुआ होगा कि सरकार को सम्मान समारोह ही स्थगित करना पड़ा। कारण ? खिलाडीयों ने मना कर दिया कि बाबा ऐसा सम्मान नहीं चाहिए। क्यों किया खिलाडियों ने ऐसा ? हरियाणा सरकार ने घोषणा की थी कि कॉमनवेल्थ में गोल्ड जीतने वाले को डेढ़ करोड़ रूपये , सिल्वर जीतने वाले को 75 लाख रूपये और ब्रॉन्ज जीतने वाले को 50 लाख रूपये दिए जाएंगे। ये इनाम भी नए नहीं है। हरियाणा में ये इनाम पिछली सरकारों में भी मिलते रहे है। हरियाणा का कॉमनवेल्थ में योगदान भी नया नहीं है पर इस सरकार को शायद अपनी खेल नीति पर पूरा भरोसा था कि इस बार तो कहाँ पदक आने है। इनाम की घोषणा कर दी। अब हरियाणा के खिलाडी 22 पदक ले आये नौ  गोल्ड मेडल 6 सिल्वर मेडल और 7 ब्रॉन्ज। अब समस्या हो गयी कि इनाम देना पड़ेगा। रेडिओ पर विज्ञापन तो बजवा दिया पर खिलाड़ियों को पैसे देने का दिल नहीं है। पिछली बार के पैसे भी बहुत रो धो के सरकार ने दिए थे तो जैसे नोटबंदी में हर रोज नियम बदल रही थी सरकार तो यहाँ भी किसी बुद्धिमान ने एक नया अजीबोगरीब पेंच लगा दिया कि सरकार इनाम तो देगी पर अगर उस खिलाडी को अगर कहीं और से भी कोई इनाम मिला है तो वो रकम काट कर इनाम देगी। यानी अगर कोई खिलाडी रेलवे में नौकरी करता है  और रेलवे वाले अगर पचास लाख रूपये इनाम देती है तो हरियाणा सरकार उस खिलाडी को पचास लाख रूपये कम देगी। अनिल विज साहब  अब कह रहे है कि ये भी दया कर के दे रहे है वरना जो आर्मी या रेलवे की तरफ से खेलता है उसे तो हरियाणा सरकार को  इनाम देने का तुक ही नहीं बनता। जय हो हरियाणा सरकार। हरियाणा में सरकार हर दिन गर्त में जाने के नए कीर्तिमान बना रही है। ऐसे ऐसे तरीके खोज कर ला रही है जिसे छोटे मोटे बटमार भी नहीं सोच सकते। कॉमनवेल्थ में 13 खिलाडी ऐसे है जिन्हे खिलाडी के तौर पर रेलवे या कहीं और नौकरी मिली और उनकी तरफ से खेले गोल्ड जीता। हरियाणा सरकार ने ऍफ़ एम् पर गाना बजाया कि उनकी खेल निति से पदक आ गए। अब मंत्री जी कह रहे है उन 13 को हम इनाम नहीं देंगे।

खिलाडी बजरंग पूनिया का कहना है कि आगे सरकार ये न कह दे कि सैलरी के पैसे भी काटेंगे। किसी सरकार  के लिए कोई सम्मान समारोह का स्थगन करना कितने अपमान की बात होती है मतलब पहले होती थी। भाजपा की सरकार के लिए तो ये रोज की बात हो गयी है। केंद्र में मंत्री जी ट्वीट करते है कि सुप्रीम कोर्ट ने आदेश  दिया है आधार लिंक करा लो। बेचारी सुप्रीम कोर्ट भी सोचती होगी  कि कहाँ फंस गए यार।  हर जगह ऐसी भसड़ मचाई हुई है कि क्या मजाल है किसी को कुछ समझ आ जाए। अभी मंत्री जी कह रहे है कि हरियाणा के जो खिलाडी किसी दूसरी संस्था से खेलते है उन्हें हरियाणा सरकार इनाम क्यों दे। ये पहली सरकार है जो इनाम देते वक्त नियम बदल रही है। अभी ओलम्पिक में साक्षी मालिक को ब्रॉन्ज मेडल मिलने पर इनाम दिया गया था वो भी रेलवे का प्रतिनिधित्व करती थी। पर अब के मसला जुदा हो गया शायद। इस बार 22 पदक आ गए। खुदा न करे कभी भारत अगर ओलम्पिक पचास साठ पदक ले आये (वैसे तो होने की सम्भावना न के बराबर ही है ) तो कहीं सरकार इनाम देने के डर से खुद को दिवालिया घोषित न कर दे।

23 वर्षीय विनेश फौगाट ओलम्पिक के क्वाटर फाइनल के मुकाबले में चोट ग्रस्त हो गयी थी। चेहरे की पीड़ा असहनीय थी। आप खेलते हुए सर्वश्रेष्ठ जगह पर पहुँचते हो। चोटिल होते हो फिर मेहनत करते हो फिर मेडल जीतते हो और फिर  सब्जी मंडी की तरह मोलभाव शुरू हो जाता है। ठीक ठीक लगा लो। पर शर्म हमें नहीं आती।

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