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Wednesday, 25 April 2018

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अमेरिका के संविधान में तेरहवी अमेंडमेंड हुई थी जिसके बाद वहां स्लेवरी को अपराध माना गया था। इसी को आधार मानकर 2016 में एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म आयी 13 जो मैंने  देखी। डॉक्यूमेंट्री का सारांश लिख रहा हूँ बाकी तो फिल्म देखने पर ही पता लग पायेगा कि कितन लाजवाब डॉक्यूमेंट्री है 



हाँ तो कहानी अमेरिका की है। ग्रेट अमेरिका। जहाँ एक वक्त पर गोरे लोग काले लोगों की खरीद फरोख्त करते थे। स्लेवरी रोजमर्रा की बात थी। एक गोरा दूसरे गोरे से काले आदमी बच्चे औरत खरीदता था जिंदगी भर के लिए। पुराना वक्त था। ग़लत बात थी सिविल वार के बाद अमेरिका वालों को समझ आया कि ये नहीं करना चाहिए यार ग़लत है। तो उन्होंने अपने संविधान में १३वीं अमेंडमेंड की। स्लेवरी को अपराध घोषित कर दिया गया। अमेरिका डेमोक्रेट होने की राह पर आ गया। काले आदमियों को भी वोट करने का अधिकार मिल गया। हालाँकि औरतो को बहुत बाद में मिला अभी 13 वीं अमेंडमेंड की बात करते है। स्लेवरी को अपराध तो घोषित कर दिया पर एक अपवाद छोड़ दिया गया। अब अपवाद क्या कि अमेरिका में सभी आजाद है सब फ्री है सिवाय क्रिमिनल्स के , सिवाय सजायाफ्ता मुजरिम के। यानी जिसकों सजा हो गयी वो इस नियम का लाभ नहीं उठा पायेगा। अगले दस पंद्रह सालों में क्या हुआ पता है। अधिकतर काले लोग जेल के अंदर भेज दिए गए। वेलकम टू फ्रीडम। 

साल 1915 में ब्लॉकबस्टर फिल्म आयी 'बर्थ ऑफ़ द नेशन " जिसकी तारीफ राष्ट्रपति ने भी की। फिल्म में काले लोगो को रेपिस्ट , डाकू ,दिखाया गया। काले लोगो की इमेज बिल्डिंग शुरू हुई उस फिल्म से। काले लोग गोरी औरतो के बलात्कार करते है। लूटपाट करते है। नायक आकर उन्हें मार देता है।.फिर 1920 -25 में आया जिम साउथ क्रो यानी सेग्रीगेशन लॉ। स्लेवरी बैन हुई तो हमने सेग्रीगेशन ला बना दिया जी। क्या लॉ था ? काले लोगो के लिए अलग रस्ते। बस में पीछे सीट। बेंच अलग। दोनों में समानता की बात करना अपराध। ये बाकायदा कानून बनाकर किया गया। ये कानून अगले 40 साल तक रहा जब तक कि मार्टिन लूथर किंग समेत बाकी काले नेताओ ने सिविल राइट्स के लिए सरकार की नाक में दम न कर दिया। 1965 अमेरिकी सरकार को समझ में आया कि ये कानून ग़लत है समाज के खिलाफ है। ऐसे सब कानून को गैर कानूनी घोषित कर दिया। ऐसा नहीं है कि इन सब आंदोलनों की कीमत अदा नहीं करनी पड़ी। आने वाले पांच -6 सालों में उन सब नेताओ को जान से मार दिया गया या जेल में डाल दिया गया जो सिविल राइट्स मूवमेंट से जुड़े हुए थे। 21 साल के फ्रेड हैम्पटन तेजतर्रार युवा नेता जिसकी बात सुनने के लिए भीड़ इकट्ठी हो जाती थी पुलिस ने इनकाउंटर में मार दिया गया रात को उसके घर से। कहा जाता यही बंदूक बिलकुल सर से सटाकर गोली मारी गयी। 38 साल के मार्टिन किंग लूथर की 1968 में हत्या कर दी गयी। उसकी हत्या के लिए जिस आदमी को गिरफ्तार कर सजा दी गयी वो मरते दम तक जुर्म से इंकार करता रहा। खैर बलिदानो के बाद ही सही अमेरिका में सेग्रीगेशन कानून ख़त्म हो गए। सबको सम्मान अधिकार मिल गए। हैप्पी एंडिंग। 

पर पिक्चर अभी बाकी है। फिर आये राष्ट्रपति निक्सन साहब। उन्होंने अपराध को अमेरिका का दुश्मन नंबर वन घोषित किया। और अपराध पर जीरो टॉलरेंस का जुमला फेंका। और देखते ही देखते अमेरिका की जेलों में कैदियों की संख्या बढ़ने लगी। कैदी कौन ? वही काले लोग। अब उन्हें निगर  न बुलाकर क्रिमिनल का नाम दे दिया गया। 1970 से अमेरिका में कैदियों का ग्राफ जो बढ़ना शुरू हुआ वो आज तक ख़त्म नहीं हुआ। 1972 में वहां 300000 कैदी थी आज 2.3 मिलियन कैदी है। दुनिया भर के कैदियों की कुल संख्या के 25 फीसदी कैदी अमेरिका में है। निक्सन के बाद रोनाल्ड रीगन आये सबने अपराध ड्रग्स के खिलाफ जंग छेड़ी और उस जंग में और काले लोगो को जेल में भेज दिया। 1988 में जार्ज बुश सीनियर ने भी इसी को आधार बना कर चुनाव जीत लिया। एक ब्लैक अपराधी  ने पैरोल से भागकर और जुर्म किये। उस ब्लैक अपराधी की फोटो को चुनाव प्रचार का हिस्सा बनाया गया कि ऐसा बुश के राज में नहीं हो पायेगा। एकदम रेसियल विज्ञापन था। बुश साहब भी जीत गए। 

फिर 1989 में एक पार्क में एक लड़की के साथ बलात्कार और फिर उसकी हत्या कर दी गयी। इस घटना ने पूरे अमेरिका को सकते में ला दिया। एक दो दिन के बाद पांच नाबालिग लड़को (सभी काले ) को पुलिस ने इस अपराध के लिए गिरफ्तार किया। उससे अगले दिन एक व्यापारी डोनाल्ड ट्रम्प ने हर अख़बार के पहले पन्ने पर लाखो रूपये खर्च कर विज्ञापन दिया। उस विज्ञापन में पांचो लड़को को फांसी देने की अपील थी ताकि सब बलात्कारियो को एक सन्देश मिल सके। उन लड़को को फांसी तो नहीं दी गयी पर दस से पंद्रह साल की सजाएँ हुई। हालाँकि कोई भी पक्का सबूत उन लड़को के खिलाफ नहीं था। उनकी उम्र 12 से 18 के बीच थी। 1999 में पुलिस ने एक आदमी को किसी जुर्म में पकड़ा और उसने कबूल किया कि उसने अकेले ने ही उस लड़की का बलात्कार और खून किया था उसका डीएनए भी मैच हो गया। 2001 में उन सब लड़को को बाइज्जत बरी कर दिया गया। 

1993 -94 में बिल क्लिण्टन साहब आये और उन्होंने और कड़े कानूनों की वकालत की और कानून बनाया कि जो बन्दा तीन बार जेल गया वो फिर जेल से बाहर नहीं आ पायेगा। इस कानून से और तेजी आयी। कमाल ही कानून था बाद में शायद 2002 या उसके बाद क्लिण्टन ने इस कानून के लिए माफ़ी मांगी। 

अमेरिका के अधिकतर राज्यों में आज भी stand your ground नाम का क़ानून लागू है। जिसमे अगर आप को किसी से खतरा महसूस हो रहा है तो सेल्फ डिफेन्स में आप अगले को गोली मार सकते हो आप गिरफ्तार नहीं होंगे। 2012 में एक गोरे आदमी ने पुलिस में फोन किया कि पार्क में एक काला लड़का घूम रहा है और उसे शक है वो अपराधी है। इतनी बात के बाद उसने उस 16 साल केलड़के को गोली मार दी जो अपने पापा के पास जा रहा था। उस गोरे आदमी की गिरफ्तारी नहीं हुई। काफी हो हल्ले के बाद जब केस चला तो वो बाइज्जत बरी होकर आ गया। 2016 में उस आदमी ने उस पिस्तौल की नीलामी की घोषणा की जिससे उसने वो लड़का मारा था। 

आज के दिन अमेरिका में जेल प्राइवेट कम्पनियो के हवाले है। खाना से लेकर सिक्युरिटी तक अरबों का बिजनेस है। एक कैदी कम होना भी वो अफोर्ड नहीं कर सकते प्रॉफिट कम हो जाता है। हर तीन काले आदमियों में से एक ने जेल की हवा खाई हुई है आज के दिन।  

ये तो उस डॉक्यूमेंट्री का सिर्फ 20 फीसदी हिस्सा बताया मैंने। डॉक्यूमेंट्री देखना। उसमे एक आदमी बोलता है कि अमेरिका और बाकी जगह भी शोषक अपने आप को अपडेट करता रहता है। शोषण के नए नए तरीके नए नए नाम ईजाद करता है जो नहीं बदलता वो होता है शोषण। 

इसी डॉक्यूमेंट्री का एक डायलॉग है 

हिस्ट्री इज नॉट जस्ट स्टफ डेट हैपेन बाय एक्सीडेंट।  we are the product of the history that our ancestor choos if we are white .if we are black we are the product of the history that our ancestor most likely did not choose.yet here we are together , the products of that set of choices.and we have to understand that in order to escape it. 


डॉक्यूमेंट्री भले ही अमेरिका की हो पर उसमें से सारा भारत दिखता है। 

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