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Thursday, 29 March 2018

फेयरवेल स्पीच


आज मैं फेसबुक के मैदान से संन्यास लेने की घोषणा कर रहा हूँ। इसके पीछे मेरा मकसद नौजवान खिलाडियों को मौक़ा देना है। ( ऐसा कहने का रिवाज है वरना तो सबको पता होता है एक प्लेयर के हटने से कौन से युवाओ को मौका मिल जाना है। खेल से तो तभी रिटायरमेंट लिया जाता है जब सांस फूलने लगता है। नए खिलाडी सोचने लगते है कि यार ये अंकल खेल का मजा ख़राब कर रहा है। )मेरे 8 साल लम्बे फेसबुक कैरियर में प्यार और स्नेह के साथ साथ जो गालियाँ मुझे यहाँ मिली उसके लिए मैं सब दोस्तों का तहे दिल से शुक्र गुजार हूँ। जब साल 2010 आधा जा चुका था तब मैंने फेसबुक खेलना शुरू किया था। तब से लेकर आज तक देखता हूँ तो एक लम्बा सफर तय कर लिया है। तुकबंदी से शुरुवात कर के फिर 2012 की क्रांति में भाग लेना फिर पिछले साल किताब तक का सफर बहुत यादगार है। मानस भारद्वाज मेरा पहला सोशल मिडिया दोस्त था जो की आज तक रहा। इसके लिए उसको नोबल नहीं तो कुछ न कुछ तो मिलना चाहिए। उसके बाद इस साल तक दोस्त बनने बिछड़ने का दौर जारी ही है। कुछ दोस्त तो लाइफ टाइम कार्ड के साथ आये हैं। 
जहाँ तक संन्यास के बाद की बात है तो मैं भी वही करूँगा जो बाकी खेलो के खिलाडी सन्यास लेने के बाद करते है। वैसे सन्यास के बाद ज्यादा कॅरियर ऑप्शन होते नहीं है। लेदेकर या तो आप कोच बन सकते है। या बाहर से कमेंट्री कर सकते है। फेसबुक पर बाहर से कमेंट्री करना बहुत आसान काम नहीं है। मैंने बहुत सन्यास लिए खिलाडियों को देखा है जो कमेंट्री करते करते मैदान में ही कूद आते है। मैं कोचिंग में अपना हाथ आजमाऊँगा। वैसे तो फेसबुक की कोचिंग देना भी कोई आसान काम नहीं है। पर इसमें अनुभव काम आ जाता है मैंने तो नाम भी सोच लिया है।

                                                           
अमोल सरोज फेसबुक कोचिंग सेंटर।
मेरी कोचिंग सेंटर में लड़कियों के इनबॉक्स में हाय कहने से लेकर प्रगतिशील बनने तक खेल के सब तकनीक को कायदे से सिखाया जाएगा। कोचिंग सेंटर के प्रोमोशन के लिए कुछ काम की बातें  रहा हूँ।
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फेसबुक बहुत प्यारी जगह है। यहाँ आप बहुत प्यारे और शानदार लोगों से मिल सकते है। दोस्त बना सकते है। बस रायता ना फैलाये। सबकी वाल का सम्मान करें। फेसबुक ट्रायल में किसी भी तरीके से भाग ना ले।  ग़लत बात पर कम से कम एक बार तो टोके। दोबारा कभी न टोके।
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कमेंट के रिप्लाई बॉक्स को बहुत सावधानी से इस्तेमाल करे। इसे ज्यादा लम्बा ना होने दे। जिनकी नीयत पर शक हो उन्हें कभी जवाब न दे।
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कुछ तकनीक खिलाडी तब सीखता है जब उसकी खेल छोड़ने की बारी आ जाती है। मेरी एक दोस्त के बदौलत ये बात भी मैंने अभी सीखी कि दोस्ती के पब्लिक  दिखावे से थोड़ा बचे। दोस्ती निजी होती है। खूब दोस्त बनाये। खूब गिफ्ट दे। खूब गिफ्ट ले। खूब पार्टी करे पर जितना हो सके फेसबुक पर कम दिखाए। आपकी नीयत ही सब कुछ नहीं होती है। फेसबुक एक सार्वजानिक प्लेटफॉर्म है। यहाँ सब तरह के लोग है। कब आपका गैंग बना दिया जाएगा पता भी न लगेगा। तो बेहतर है दोस्ती को फोन  और अपने घर  तक रखें।
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कभी भी , कभी भी न भूले फेसबुक एक सार्वजानिक प्लेटफॉर्म है। न गालियां दे ना ऐसे दोस्त बनाये जो गालियों को बढ़ावा देते हो। यहाँ दोस्तों की कमी नहीं है। ऐसे भी बहुत मिल जाने है जो गालियां नहीं देते होंगे। यकीन मानिये बहुत अच्छा लगता है जब आप बीमारी से दूर होते हो। बहुत मजा आता है बिना गालियों के बात करने में।
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कोशिश कीजिये कि सार्वजानिक रूप से कभी इंटेंशनली किसी दोस्त को हर्ट करने की कोशिश न करे। कमेंट करते वक्त दो बार सोच ले। इनबॉक्स का ऑप्शन भी खुला रहता है। एक बार तीर कमान से निकलने के बाद वापिस नहीं आता। अच्छे दोस्त को हर्ट करने के बाद जो फीलिंग आती है वो बहुत बुरी होती है। आनंद बक्शी ने बोला भी है
जब जिस रोज किसी का यार जुदा होता है
कुछ मत पूछो यारो दिल का हाल बुरा होता है।

बाकी तकनीक मैं अपने कोचिंग सेंटर के लिए बचा के रखता हूँ।
फेयरवेल पार्टी की जरुरत नहीं है। अरे नहीं नहीं रोने की भी जरुरत नहीं है। हँसके विदा करो। रोने की क्या बात है। रोने की कोई बात नहीं है। देखो इमोशनल कर दिया तुम लोगो ने मुझे भी 

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