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Wednesday, 28 March 2018

खाप पंचायत , सुप्रीम कोर्ट और बालिग़ की शादी


यह अदालत का दायित्व है कि वह नागरिको के बीच ऐसा माहौल बनाने की कोशिश करे कि बालिग बिना डर के मर्जी के शादी कर सकें। शीर्ष अदालत ने कहा कि कानून प्रतिष्ठा के नाम पर किसी समूह या पंचायत द्वारा प्रेम या विवाह को लेकर किसी को प्रताड़ित करने या उसके साथ अत्याचार करने की इजाजत नहीं देता। “

जब दो बालिग स्वेच्छा से शादी करते है तो वे अपनी राह खुद चुनते है वे समझते है कि यही उनका उद्देश्य है तो उन्हें ऐसा करने का पूरा अधिकार है। उनके अधिकार में दखल देना असंवैधानिक है। कोई भी समूह या पंचायत किसी राजा की तरह लड़का लड़की को हाजिर होने के लिए नहीं कह सकता। “

ये स्टेटमेंट भारत की सुप्रीम कोर्ट ने खाप पंचायतों के लिए दी है। ये स्टेटमेंट सुप्रीम कोर्ट को क्यों देनी पड़ी ? भारत देश में कभी मनु का संविधान चलता था। मनु का कहना था कि दलितों और औरतो को सम्पति रखने का अधिकार नहीं है। औरत को आजाद रहने का अधिकार नहीं है। सदियों बाद भारत को वो संविधान मिला जिसमें सब इंसानो को बराबर कहा गया। सबसे कमजोर तबके के हकों को भी सुनिश्चित किया गया। उसी संविधान में कहा गया कि बालिग होने पर देश का नागरिक अपनी मर्जी से अपने दोस्त , अपना जीवनसाथी चुन सकता है। शादी कर सकता है। पर अफ़सोस न तो भारत के लोग ऐसे संविधान के लिए तैयार थे न उन्हें तैयार किया गया। विज्ञानं की तरह उन्होंने इस किताब को भी रट भले ही लिया पर व्यवहार में उनका अपना कानून चलता रहा 

अब हरियाणा की बात करे तो यहाँ शादी के लिए  बालिग होना ही जरुरी नहीं है । आप अपनी जाति से बाहर शादी नहीं कर सकते। कानून इजाजत देता है पर फिर भी 99 फीसदी लोग अपनी ही जाति में शादी करते है आप अंदाजा लगा सकते है कि पहरा कितना गहरा होगा। फिर आप अपनी जाति में भी हर किसी से शादी नहीं कर सकते। आप अपनी गौत्र में शादी नहीं कर सकते। अगर आप ऐसा करते है तो समाज आपकी और आपके जीवनसाथी की हत्या करके आपकी शादी को नल एंड वोयड करार कर देगा। इसी परम्परा के खिलाफ कल सुप्रीम कोर्ट ने ये आदेश दिए है  ये देश के नागरिक के अधिकारों का हनन है। कोई कहीं भी शादी कर सकता है। उसे रोका नहीं जा सकता है।  कानून की किताब पढ़े इंसान से ऐसी ही बात की अपेक्षा की जाती है। पर कहानी अभी बाकी है। 

जो जज , जो कोर्ट अपने संविधान का रखवाला बताता है। जिसके जिम्मे संविधान की रक्षा  है उनका हाल देखिये। राजस्थान हाई कोर्ट के बाहर मनु की मूर्ति लगी है। इस मूर्ति का लगना ही बताता है कि जिन लोगों को भारतीय संविधान को लागू करने की जिम्मेदारी दी गयी है उनकी श्रद्धा किस कानून में है।  साल 2015 की बात है  राजस्थान हाईकोर्ट के जज ने अपनी 30 साल की बेटी घर मे कैद कर रखी थी । प्रेमी सुप्रीम कोर्ट गया । सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के जज को समझा बुझा कर बेटी और प्रेमी का मिलन करवा दिया।  हाईकोर्ट के इन जज साहब ने कितने हॉनर किलिंग के मामलों में जजमेंट दिया होगा । कितने प्रेमी युगल अपने पेरेंट्स से जान बचाते इनके पास आये होंगे ।

 अभी पिछले साल हादिया केस में केरल हाई कोर्ट के जजमेंट के अंश देखिये 

एक लड़की जो सिर्फ 24 साल की है इस उम्र में लडकी भावुक और आसानी से प्रभावित हो जाने वाली होती है जिसका की बहुत तरीको से शोषण सम्भव है 

वर्तमान हालातों में ये बहुत ही खतरनाक होगा कि अखिला जो चाहती है उसे करने दिया जाए 

-उसकी उम्र को देखते हुए कहा जा सकता है कि वो केवल अपने माँ बाप के पास ही सुरक्षित रह सकती है 

शादी एक लड़की की जिंदगी का महत्वपूर्ण निर्णय है ये  माँ बाप की इजाजत से ही लिया जा सकता है। 

अब ये सब बातें किस कानून में लिखी है  सबको पता है। केरल हाई कोर्ट ने एक 24 साल की लड़की  की शादी बिना उसकी मर्जी के रद्द कर दी जबकि वो लड़की न तो पागल थी न अपने निर्णय लेने में अक्षम थी। जिस सुप्रीम कोर्ट ने कल खाप पंचायतों को बालिग नागरिको की शादी में टाँग न अड़ाने का आदेश दिया है। उसी सुप्रीम कोर्ट के पास पिछले साल हादिया का केस गया था। केस तो कुछ था ही नहीं। पर सुप्रीम कोर्ट ने लड़की को पढ़ने के लिए कॉलेज में भेज दिया और केरल हाई कोर्ट के आदेश को रद्द भी नहीं किया और केस को अगली तारीख दे दी। 

सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश खाप पंचायत को दिए है वो स्वागत योग्य है बशर्ते कि कोर्ट अपने जजों को भी ये बात समझा सके। चिराग तले अँधेरे वाली बात इतने बड़े देश के सर्वोच्य अदालत के लिए कहना अच्छा नहीं लगता। पर उन्हें भी एक बार सोचना चाहिए। वो मनु महाराज की अदालत में नहीं बैठे है भारतीय लोकतंत्र की अदालत है। इसका सम्मान बचाये रखना उनकी जिम्मेदारी है 


1 comment:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक २९/०३/२०१८ की बुलेटिन, महावीर जयंती की शुभकामनायें और ब्लॉग बुलेटिन “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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