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Thursday, 31 August 2017

अशिक्षा , भुखमरी , बढ़ता हुआ अन्धविश्वास दोषी कौन

 गुरमीत राम रहीम को आज आखिरकार सजा मिल ही गयी। समाचार पत्रों में , टीवी चैनलों में उत्साह का माहौल है। आख़िरकार 15 सालों के बाद फैसला राम रहीम के खिलाफ गया। हरियाणा की दीवारों में सबसे ज्यादा लिखा हुआ जुमला ,जिसका अर्थ आज तक समझ नहीं आया, आज फिर याद आ गया 

सच परेशान हो सकता है पराजित नहीं। 

सच  की  जीत हो गयी। इन 15 सालो में संत  राम रहीम ने बहुत कुछ हासिल किया। उनके अनुयायीयों की संख्या अब दुनिया भर में 5 करोड़ बताई जाती है। आज से एक महीने पहले तक बाबा पर खबर तो जाने दो , उन पर हास्य व्यंग्य करने के लिए भी बहुत हिम्मत की दरकार होती थी। एक हास्य कलाकार को मजाक करने के जुर्म में गिरफ्तार करके मुंबई से हरियाणा लाया गया था। ये उनका जलवा था। आज बहुत मॉडर्न हिन्दू  राम रहीम के भक्तों पर तरस खा रहे है। उनका मजाक उड़ा रहे है। अंग्रेजी में एक शब्द है irony उसका हिंदी में ठीक ठाक शब्द मुझे मिला नहीं। मैं विडंबना इस्तेमाल कर लेता हूँ। विडंबना देखिये भारतीय मिडिया अंधभक्ति के दुष्प्रभाव बता रही है। ये  बिलकुल वैसा ही नहीं है कि एक बीमार दूसरे की बीमारी पर हँस रहा हो। चंडीगढ़ पंचकूला प्रदेश की राजधानी है। प्रदेश की राजधानी में 40 आदमी पुलिस की गोली से मारे गए इस बात को खुद पुलिस स्वीकार कर रही है। 40 आदमियों का स्टेट द्वारा मारा जाना चर्चा का विषय नहीं है। कौन लोग थे वो ? ये वो लोग थे जो स्टेट की शिक्षा और खाने जैसी आधारभूत जरूरतों से अपना मुंह फेर लिए जाने के कारण बाबाओं के चक्कर में फंसे थे। बहुत से लोग तो वहां खाना और हजार रूपये के एवज में वहां लाये गए थे। उन्हें नहीं पता था कि खाने की कीमत उन्हें गोली खा कर चुकानी पड़ेगी।  गोरखपुर के बच्चों को भी कहाँ पता था कि जिस  सरकारी अस्पताल में वो अपनी बीमारी कराने जा रहे है वो अस्पताल खुद इतना बीमार होगा कि उनकी ज़िन्दगी खा जायेगा। डॉक्टर गुरमीत के खिलाफ 2005 में दो साध्वियों ने सीबीआई अदालत में अपने बयान दर्ज करवाए थे। 2014 में विधानसभा चुनाव से तीन दिन पहले डॉक्टर गुरमीत ने अपने अनुयायियों को बीजेपी को वोट देने को कहा। बीजेपी की सरकार बनी। अक्टूबर 2014 में प्रधानमंत्री मोदी जी ने ट्वीट किया 

"Appreciable effort by Baba Ram Rahim ji & his team. Will motivate people across India to join Swachch Bharat Mission,"

 पिछले रविवार को प्रधानमंत्री जी ने बयान दिया कि आस्था के नाम पर हिंसा न देश बर्दाश्त करेगा ना सरकार। आप धर्म निरपेक्षता को , सेक्युलरजिम को कितनी ही गाली दे पर ये एक सेकुलर स्टेटमेंट थी। सेक्युलरजिम को फिलहाल होल्ड पर रखते है वो वैसे भी अभी देश में होल्ड पर ही है। आज एक अख़बार की ही खबर है। गाय चोरी के शक में दो लोगों को फिर पीट पीट कर मार दिया। खैर मोब लिंचिंग को भी फ़िलहाल जाने देते है। पंचकूला में मारे गए 40 भारतीय नागरिकों की बात करते है। उन 40 लोगों की मौत का कौन जिम्मेदार है ? प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा जी कहते है कि धारा 144 डेरा प्रेमियों पर लागू नहीं होती है। प्रदेश के शिक्षा मंत्री का बयान देश  के लिए बहुत महत्व रखता है। उन 40 लोगों ने भी ये स्टेटमेंट सुनी होगी। उन्हें भी लगा होगा वो कोई गैरकानूनी काम नहीं कर रहे है। पंचकूला में एक से दो लाख लोग सुनवाई से दो तीन  दिन पहले जमा हो गए थे। वो वहां किसी के घर में नहीं ठहरे थे। उन्हें वहां खाना मिल रहा था। सुबह शौच भी गए होंगे। फिर उन्हें गोली भी खाने को मिली। सवाल ये है कि क्या वो एक से दो लाख लोग वहाँ अशांति पैदा करने आये थे या स्टेट ने जानबूझ कर ऐसे हालत पैदा किये कि आम जनता की सम्पति का भी नुक्सान हो और जान भी आम जनता की ही जाए। 40 का आंकड़ा सरकारी है। जिनकी प्लेट  में अश्लीलता की हद तक खाना भरा हुआ है। जिनके बच्चे कॉन्वेंट स्कूल में अंग्रेजी में प्राथना करते है जो शादी करते वक्त सरनेम की तलाश रहती है जिन्हे गंदगी देख कर उबकाई आती है  उन्हें ये सवाल तर्क का लग सकता है कि दो लाख आदमी ऐसे  आदमी के लिए क्यों गोली खाने  गए जिसपर बलात्कार का आरोप लगा है। वही लोग उस पार्टी को वोट देकर आते है उस नेता की तारीफ के पुल बाँध देते है जो उस बाबा के आशीर्वाद लेने जाते थे जिसे आज बलात्कारी बाबा कहकर मिडिया बुला रहा है । समाज के यही तर्कशील सम्मानित लोग बगले झांकते नजर आते है जब इनसे भूखे मरते , भीख मांगते बच्चों , जातिवाद , छुआछूत का डंस झेलते देश के नागरिकों के बारे में पूछा जाता है। जब आपने उन्हें भूखा मरने के लिए , अशिक्षित  के लिए , गन्दगी में रहने के लिए छोड़ा हुआ है तो वो आपसे पूछकर अपना भगवान् चुनेंगे

 देश की तथाकथित पढ़ी लिखा सभ्य समाज अभी गणेश चतुर्थी बनाने में लगा है। देश के प्रधानमंत्री जी कह चुके है कि दुनिया की पहली सर्जरी भगवन शिव ने की थी जब गणेश को हाथी की सूंड लगा दी थी। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि आस्था के नाम भी हिंसा बर्दाश्त नहीं की जायेगी। ये भी गाइडलाईन साफ़ कर देनी चाहिए कि आस्था के नाम पर क्या क्या बर्दाश्त किया जाएगा। त्यौहार के नाम पर प्रदूषण काबिले बर्दाश्त है भले ही उससे बीमारों की जान चली जाए। आस्था के नाम पर विज्ञान का मजाक बर्दाश्त है। डॉक्टर राम रहीम का भगवान् बनना मूर्खता है पर मनमोहन देसाई का अपनी फिल्म में साईं बाबा का निरुपमा राय को आँखे देना सृजनता का नमूना है। अन्धविश्वास को आम जनता के दिल में कूट कूट कर के भरने वाले निर्देशक लीजेंड है क्योंकि उससे मंदिर की कमाई में इजाफा होता है। ये कमाल की तर्क शक्ति है हमारी जो कांवड़ यात्रा को न्याय संगत ठहराती है , मंदिरों की भीड़ को न्याय संगत ठहराती है। वहीँ दूसरे की आस्था का मजाक उड़ाती है। इसमें कोई शक नहीं है डॉक्टर गुरमीत समेत अनेक धूर्त बाबा देश में मौजूद है जो देश की गरीब अशिक्षित जनता का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करते है पर इस जनता के गरीब , भूखी और अशिक्षित होने के पीछे कौन जिम्मेदार है इस पर कोई बात नहीं करेगा। 

आखिर में इस सारे प्रकरण में एक अच्छी बात ये हुई है कि न्याय पालिका की कई दिनों बाद या  कई सालों बाद तारीफ हो रही है। ये बहुत जरुरी था। पिछले सालों में न्यायपालिका के फैसलों का जिस तरह से मजाक उड़ रहा था थोड़ा सा डेमेज कंट्रोल जरुरी था। जिस तरह भगवान् के विचार के पीछे ये तर्क सबसे अहम है कि "कोई है जो देख रहा है " का विचार फील गुड कराता है। वैसे ही ये विचार कि "न्याय पालिका है निष्पक्ष माय लार्ड है " थोड़ा अच्छा फील कराते है। न्याय पालिका ने सरकार की आलोचना भी की। थोड़ा और अच्छा फील हुआ। पिछले कुछ सालों के जिन फैसलों से बहुत निराशा हुई उनमे सबसे ज्यादा केरल की 24 साल की डॉक्टर अखिला की शादी के संदर्भ में सुनाया गया फैसला था।  फिर सिनेमा हाल में राष्ट्र गान वाला फैसला था। सलमान वाले फैसले से भी निराशा हुई थी। हाई कोर्ट के जज का मोर के आंसू वाले बयान से भी दुःख हुआ था। 


"संत डॉक्टर राम रहीम के केस में हुए फैसले का फिर भी स्वागत है। बहुत से मासूम लोगों का डेमोक्रेसी पर और न्यायपालिका पर विश्वास कायम हुआ होगा जो कि बहुत जरुरी भी था।  ये भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि राम रहीम को  अन्धविश्वास फैलाने के लिए सजा नहीं हुई है बलात्कार करने के लिए सजा हुई है। अन्धविश्वास फैलाना भारत में अपराध नहीं है। 

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