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Sunday, 18 June 2017

सलम्बा गाँव का सपना II - सभ्य समाज और लैट्रिन




हां, तो बात सपने की हो रही थी सपने में मैं स्वच्छ भारत अभियान में बाधा पहुँचाने वाले दुश्मनों की हेकड़ी निकालने उनके गांव सलाम्बा पहुंचा तो देखा वहां तस्वीर वैसी नहीं थी जैसी हकीकत में हमें दिखाई गई थी। सपनों की अपनी तासीर होती है। सपनों को हकीकत से ज्यादा मतलब नहीं होता। वहां इस्लाम जी से बात करने के बाद मैं पानी पीने अयूब के घर पहुंचा तो सपना ऐसा कुछ दिखा रहा था जिस पर सपने में भी विश्वास नहीं हो रहा था।

अयूब एक 25 -26 साल का लड़का है। गुड़गांव, सोहना जाकर मजदूरी करता है। बीवी है बच्चे हैं। कहा जाता है, घर ईंट-पत्थरों से नहीं बीवी-बच्चों से बनता है। पर रहने के लिए तो ईंट-पत्थरों के घर की ही जरुरत होती है। जब मैं अयूब के घर गया तो अयूब के पास सब था पर घर नहीं था। तिरपाल से एक छांया-सी बनाई हुई थी, जिसमें वो अपने परिवार के साथ रहता था। बारिश आने पर तिरपाल टपकता है। रहने सोने के घर पर पक्की छत नहीं है, पर घर के कोने में पक्का बना हुआ लैट्रिन दिखाई दे रहा था। कभी देखा है आपने घर में पक्का लैट्रिन हो और रहने के लिए तिरपाल का सहारा हो ? मैंने जब पूछा ये क्या है, तो अयूब ने बताया कि 20000 कर्जा लेकर ये लैट्रिन बनाना पड़ा। उसका ब्याज चुकाने में दिक्कत हो रही है। पानी की भी दिक्कत है। पर क्या करें?

दिमाग़ हिला देने वाली घटना है। रहने को घर नहीं है, पर कर्ज लेकर लैट्रिन बनवानी पड़ रही है। अयूब अपने भाई के घर भी लेकर गया। घर क्या था, सिर्फ इतनी जगह थी कि दो आदमी सो सकते थे। वहां पांच इंसान रहते हैं। अयूब का भाई भी मज़दूरी करता है। मैं गाँव में गुंडे ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा था, जो लोगों को लूटते हैं। डाकू ढूंढ रहा था जिसके लिए मेवात बदनाम है। पर मुझे मिल मजदूर रहे थे जिनके पास रहने के लिए उतनी जगह भी नहीं थी जितनी जगह में मिडल क्लास के बाथरूम होते हैं।
ये कौन से भारत का निर्माण हम कर रहे हैं ? जहाँ देश के नागरिकों को टट्टी जाने से रोका जा रहा है। टट्टी जाने को हेकड़ी से जोड़ा जा रहा है। अब बात आजादी की रही ही नहीं है। बात ये है कि इंसान टट्टी कर सकता है या नहीं ?
ऐसा दुनिया में पहले किसी सरकार में हुआ है या नहीं इतिहास के जानकार बताएं। गरीबों को टट्टी जाने में डर लग रहा है, कहाँ करें ?
घर में? घर नहीं है तो ?
क्या करें ? रोटी न भी खाए फिर भी टट्टी पेशाब आ ही जाता है, कहाँ करें ?
हुक्मरान कह रहे हैं जो टट्टी करे उसके पिछवाड़े में डंडा घुसा दो।
मुस्कुराइए आप भारत में हैं।
सपने से बाहर आता हूँ तो हकीकत बहुत अलग दिखती है। बड़ा-सा फ़्लैट है हर कमरे के साथ अटैच्ड लैट्रिन-बाथरूम है। बिलकुल समझ नहीं आता कि जब हरेक कमरे से अटैच्ड बाथरूम है तो कोई क्यों खेतों में शौच के लिए जाएगा। क्यों जाएगा वो आपको उस हकीकत में तो नहीं समझ आ सकता जिस हकीकत में आप जी रहे हैं। आप चाहें तो मैं आपको सपनों की दुनिया में लेकर जा सकता हूँ, जहाँ जाकर आपको समझ आएगा। दिल्ली से ज्यादा दूर भी नहीं है वो दुनिया। 

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