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Saturday, 10 June 2017

प्रेम कहानी : एंटी रोमियो स्क्वायड Chapter 07





विजय फ़्लैशबैक में गुम था। उस दिन लक्ष्मी के जाने के बाद विजय कितनी देर जनकपुरी मेट्रो स्टेशन पर बैठा रहा था। बाहर जाने के सारे रास्ते उस दिन जैसे उसके लिए बंद हो गए थे। तभी एकाएक उसे अजमेरी गेट के पास उस एसटीडी बूथ पर बैठने वाले बूढ़े आदमी की याद आई. जहाँ से विजय रोज़ लक्ष्मी के ऑफिस में कॉल करता था। लक्ष्मी ऑफिस से रोज़ 6 बजे या उसके बाद ही आती थी पर विजय साढ़े चार बजे वहाँ पहुँच जाता था। और हर दस-पंद्रह मिनट में लक्ष्मी के ऑफिस में फ़ोन मिलाता था। पूरे एक साल हफ़्ते में छह दिन विजय का ये ही शेड्यूल था। 6 बजेदिल्ली गेट से सीधी पीरागढ़ी की बस में बैठते थे डेढ़ घण्टे का वो ब्लू लाइन बस का सफ़र जन्नत जैसा लगता था। पिछले महीने जब विजय लक्ष्मी को फ़ोन करके बूथ वाले अंकल को पैसे देने लगा। तो अंकल ने बड़ी मुश्किल से विजय को कहा

"
मेरे लिए एक समोसा और जलेबी ला दोगे ?"

अंकल शायद पैरालाइज़ थे। हाथ काँपते थे। बोला भी ठीक से नहीं जाता था। चलने की भी शक्ति नहीं थी। विजय को समझ नहीं आया कि अगर उसने समोसे ला भी दिए तो अंकल खाएँगे कैसे ?फिर भी विजय अंकल के लिए समोसे और जलेबी ले आया। समोसे और जलेबी देख कर अंकल ने इशारे से उन्हें सामने रखी प्लेट में रखने को कहा। विजय ने समोसे और जलेबी उस प्लेट में रख दी। अंकल के हाथ इतने काँप रहे थे कि उन हाथों से वो समोसे और जलेबी खाना लगभग असम्भव था। यहाँ जाकर विजय को अंकल की मंशा समझ आयी। अंकल चाहते थे कि वो समोसा विजय उन्हें अपने हाथों से खिला दे। विजय को एक बार अजीब लगा फिर उसके सामने लक्ष्मी का चेहरा घूम गया। बचपन से एक भजन हमेशा सुना हुआ था

तुलसी इस संसार में सबसे मिलिए धाय
ना जाने किस रूप में नारायण मिल जाए

विजय को वो अंकल नारायण का रूप लगने लगे थे,वो वैसे भगवान् में विश्वास नहीं रखता था पर यहाँ उसने रिस्क लेना ज़रूरी नहीं समझा। उसने अंकल को अपने हाथों से समोसा और जलेबी खिलाया । उसके बाद जब जाने लगा तो अंकल ने रोककर वो प्लेट धोकर साफ़ करने की गुज़ारिश की । नारायण कलयुग के हिसाब से कुछ ज़्यादा डिमांड कर रहे थे पर प्रेम में लोगों ने पहाड़ काटा हुआ है । विजय ने वो प्लेट बिलकुल साफ़ करके वहीं रख दी । 


फिर तो ये रोज़ का काम हो गया । अंकल  ने उसे बताया कि उसके घरवालों को पता नहीं लगना चाहिए । उसके बेटे और बहू उसे खाने नहीं देते हैं । पिछले कितने सालों से वो सिर्फ़ दाल और सूखी रोटी पर ही निर्भर है । विजय को अब लगने लगा था कि उसकी और लक्ष्मी की शादी अब महज़ वक़्त की बात है नारायण ख़ुद आशीर्वाद देंगे ।

लक्ष्मी के जाने के बाद विजय को उस अंकल की याद आई । पिछले चार-पांच दिनों से वो अंकल को समोसे नहीं खिला पाया था । वहाँ जाना ही नहीं हुआ था । उसने जनकपुरी से सीधे अजमेरी गेट का ऑटो पकड़ा । नारायण तो उदार हैं परीक्षा ले रहे हैं ।  जैसे ही वो एसटीडी बूथ पर पहुँचा तो देखा कि बूथ बंद है । पास वाली दुकान पर पूछा तो पता चला कि अंकल हॉस्पिटल में है तीन दिन से। साथ वाली दुकान वाला कहने लगा

"
बूढ़े को शुगर थी,BP था,पैरेलाइज़ था । चटपटा और मीठा खाना मना था पर वो मानता नहीं था । अब तीन दिन से सारे घरवाले दुखी हैं । यहाँ भी जाने कैसे बदजात लोग है जो उस बूढ़े को अपने हाथ से समोसे जलेबी खिला जाते थे।


1 comment:

  1. हाहाहा,कलयुगी भगवान विजय ने ग़लत प्रसाद लगा दिया भगवान को,सीधे अस्पताल पहुँचा दिया

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