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Tuesday, 6 June 2017

प्रेम कहानी : एंटी रोमियो स्क्वायड ( Chapter 03 )




विजय उस लड़की को देख रहा था छुप-छुप कर,बिलकुल लक्ष्मी की कॉपी लग रही है । 6 साल बाद लक्ष्मी उसके सामने आकर खड़ी हो जाए तो वो उसे पहचान पाएगा या नहीं इस बात को लेकर विजय निश्चिन्त नहीं था पर इस बात पर वो बहुत कॉन्फिडेंट था कि सामने बैठी लड़की की शक्ल हूबहू लक्ष्मी से मिलती है । वो सोचने लगा क्या हो गर एक दिन लक्ष्मी उसे सरप्राइज़ कर दे एकदम सामने आकर । क्या वो उससे बात कर पायेगा । वैसे सरप्राइज़ देने में लक्ष्मी माहिर थी । उस दिन क्लास में भी एक दम उसे क्या सूझा । टीचर डेरिवेटिव पढ़ा रहा था विजय लक्ष्मी अपनी कॉपी में लिखकर बातें करने में मशगूल थे । दोनों की ये फेवरेट ज़ुबान थी मेट्रो में भी वो इसी ज़ुबान में बात करते थे ।

लक्ष्मी ने अचानक लिखा

"
मुझसे शादी करोगे ?"

विजय को लगा लक्ष्मी मज़ाक कर रही है । उसने लिखा

"
पागल"

"
हाँ या ना ?"

"
क्या हाँ या ना ?

"
शादी करोगे मुझसे ?"

"
पागल शादी कैसे हो सकती है अपनी "

"
जैसे सबकी होती है । मंदिर में , कोर्ट में , कैसे भी "

"
तुम बंगाली हो और मैं "

"
बंगाली से शादी करने से भी तुम्हारे यहाँ इज़्ज़त में कमी हो जाती है क्या ?"

"
तुम ब्राह्मण हो मैं "

"
मेरे पापा कामरेड है हम तुम्हें भी कामरेड बना देंगे। कामरेड वर्ण भेद नहीं मानते सिर्फ वर्ग मानते है । दो सीए का वर्ग एक ही होता है "

"
तुम्हें टाँग खींचने के लिये और कोई नहीं मिला आज "

"
हाँ या नहीं जल्दी बताओ "

"
नहीं मुझमें इतनी हिम्मत नहीं है । हम दोस्त ही अच्छे हैं "

"
मुझे दोस्ती में इंटरेस्ट नहीं है । लड़का लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते । फ़िल्म नहीं देखते क्या "
"
मैं तुम्हें डिज़र्व नहीं करता । मेरे पास कुछ नहीं है। कॉन्फिडेंस भी नहीं है । बोलते हुए तुतलाता हूँ । मैं किसी को इम्बेरिस नहीं करना चाहता "

"
हाँ आवाज़ तो ख़राब है तुम्हारी । पर तुम्हें आवाज़ की ज़रूरत कहाँ है । तुम्हारी आँखे कितना कुछ बोलती है । तुम्हारी आँखों में तुम्हारा दिल का सारा हाल दिख जाता है "

मामला अब सीरियस हो चुका था । लिखते हुए विजय के हाथ कांपने लगे थे । कांपते हाथों से विजय ने लिखा


"
क्या देखा मेरी आँखों में तुमने "


लक्ष्मी ने जवाब में लिखा

"
हवस , वासना , सेक्स की भूख । एक नम्बर के ठरकी हो तुम "

ज़्यादा देर सीरियस रहना लक्ष्मी के बस की बात नहीं थी ।

"@%@*
२९३७३8&#^३ खेल बिगाड़ने में तुम्हें क्या मज़ा आता है "

"
तुम हाँ क्यों नहीं बोल रहे हो ? क्या दिक़्क़त है तुम्हारी "

मैं हाँ लिखने ही वाला था कि मेरे हाथ से किसी ने पैन छीन लिया । पीछे मुड़कर देखा तो सर जाने कब से हमारे पीछे खड़े थे उन्होंने कॉपी ली और लिखना शुरू कर दिया

" success removes all barrier of life. Concentrate on study . Once you both become CA , I myself will arrange your marrige.

विजय कॉफी हॉउस में बैठा अकेला हँस रहा था आँखों में आँसू थे हर सन्डे की यही कहानी थी अभी तो 11 भी नहीं बजे थे।


1 comment:

  1. विजय की कहानी पूरी जानने की उत्सुकता बढ़ती जा रही है

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