Followers

Thursday, 1 June 2017

नोटबन्दी के फायदे अभी जारी है

हमारे वित्त मंत्री जेटली जी है । जिनकी यादाश्त थोड़ी कमजोर है उन्हें बता दूं 2014 के चुनाव में वो अमृतसर से हार गए थे । हार के कुछ ही दिन बाद वो वित्त मंत्री बन गए थे । सरकार बनने से पहले वो वोडाफोन के चर्चित केस के वकील थे । वो खैर ज़्यादा बड़ी बात नही है । गिनती के तो बड़े वकील है सभी किसी न किसी पार्टी से जुड़े है पार्टी मतलब वो पार्टी नही जो अपन करते है दोस्तो के साथ मिलकर । राजनैतिक दल जिसकी एक विचारधारा होती है । सभी राजनैतिक दलों को चलाने के लिये पैसों की जरूरत होती है पैसा कॉरपोरेट कंपनियों के पास होता है । कंपनी खुद कंपनीज एक्ट 2013 के अनुसार एक आर्टिफिसियल पर्सन है जिस पर मुकद्दमा हो सकता है । और मुकद्दमे के लिये फिर उसे वकील की जरूरत होती है । ख़ैर इस सारे मसले में एक पेंच मुझे कभी समझ नही आया पोलटिकल पार्टी को तो ये कंपनियां करोड़ो अरबो रुपये दे देती है पैसे का उसूल है सूद समेत वापिस लेना । पर कभी पोलटिकल पार्टियों को पैसे वापिस करते देखा नही । वो देंगी भी कहाँ से वो तो जनता की सेवक है चौकीदार है । ये पेंच जिस दिन मैंने खोल लिया इस दिन मैं स्वघोषित ज्ञानी नम्बर वन बन जाऊँगा। वैसे मुझे पता नही है  जेटली जी तो मंन्त्री बन गए थे उस वोडाफोन केस का क्या हुआ ? अम्बानी अडानी के कर्जो का क्या हुआ ? नोटबन्दी में कौनसी कम्पनी मुनाफे में गई ।

बाकी मुझे क्या । आज जेटली जी का अखबार में बयान आया था कि नोटबन्दी से अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है ।नौकरी वॉकरी बहुत आई है । जीडीपी तो नोटबन्दी के कारण कम नही हुई है उसे तो वैसे भी कम ही होना था हमने काम ही ऐसे किये है। मुझे जेटली जी अच्छे लगते है । परेश रावल से लेकर अभिजीत तक , स्टार स्पोर्ट्स से लेकर जी न्यूज तक बेशर्मी करने वाले मुझे कभी से पसन्द है । बेशर्म बनो तो सलीके के बनो।  ये क्या कि कहते फ़िरो बैंक वालो ने बिगाड़ दिया , बेईमानो ने नोटबन्दी फेल कर दी । जब बेशर्मी ही करनी है  तो खुल कर करो । कौन हाथ पकड़ने वाला है। नोटबन्दी देश के लिये अच्छी थी । गिरती जीडीपी देश के लिये और अच्छी है । और जीडीपी गिरे या बढ़े आम आदमी के हाथ तो घण्टा नही आना तो जेटली धड़ल्ले से बोल सकते है। फिर उनकी तो इज़्ज़त भी है और इतनी है कि उनकी इज़्ज़त इज़्ज़त में दो तीन गाँव मजे में रह सकते है ।

दरअसल सरकार ने  जनता को रग को पकड़ लिया है । जनता को अपने अहम की संतुष्टि चाहिए बाकी कुछ नही चाहिए । नरेंद्र बाहुबली । फिल्मो का नायक । सरकार अपने कामों से और मीडिया से आम जनता और प्रगतिशील तबके दोनों को खुश रख रही है ।कल एक दोस्त मुझे एक चैनल की क्लिप दिखा रहा था । स्पेन वालो का मानना है मोदी दुनिया का सबसे ताकतवर नेता है । ट्रम्प उसके बाद आता है । आम जनता इसमें खुश है । भारत का नायक दुनिया मे ढंका पीट रहा है । जीडीपी वीडीपी तो बड़े बड़ो को समझ नही आती ना ही जीडीपी से आम जनता को कुछ फर्क पड़ता है । वो न्यूज़ में अच्छी अच्छी खबरों से खुश है उनका अहम इतना ही है इसी बात से खुश हो जाता है कि झूठी सच्ची कुछ हो भारत मे एक ऐसा आदमी है जो सारी दुनिया पर राज कर रहा है । अमिताभ बच्चन और सलीम जावेद ने इसी वजह से बरसों घटिया सिनेमा देने के बावजूद बॉलीवुड पर राज किया । इसके उलट प्रगतिशील तबके का  अहम मोदी की सरकार की आलोचना करने से तुष्ट हो जाता है उसके भी दुनिया भर के मौके है । सब खुश है । पाकिस्तान ने भारत के सैनिक मार दिए प्रगतिशील तबका " दस सिर दस सिर " करने लगता है । हाथ की हाथ अखबार छाप देता है पाकिस्तान के भी 20 मारे जनता खुश । पूछने की सोचने की न तो जरूरत है न ही साधन । अभी हमारे मंन्त्री रामबिलास शर्मा ने एक सभा मे कहा हमारे सैनिक पाकिस्तान के 250 किलोमीटर अंदर जाकर मार आये । जनता खुश है ढाई मीटर ढाई किलोमीटर या ढाई सौ किलोमीटर क्या फर्क पड़ता है मंन्त्री जी का कुत्ता लांडा नही है । शर्मा जी की ज्यादा बात नही करते  एक तो वो मेरिट वाले है दूसरे शर्मा जी की ज्यादा बात हुई तो यहाँ मोर ही मोर आ जाने है ।

बाकी जेटली जी पूछना तो नही चाहिए पर नोटबन्दी में सारे नोट वापिस हो गए तो अभी जो मिल रहे है करोड़ो वो कहाँ से आ रहे है और सारे आ ही गए तो पुराने नोट रखना अपराध क्यो है ? अपने देश की मुद्रा रखना अपराध क्यो है ?

1 comment: