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Wednesday, 7 June 2017

ये ऊँचे महल चौबारे सब कांग्रेस राज के है



मेरे दादा जी कमाल के कैरेक्टर थे। अंग्रेजो के वक्त अंग्रेजो की इंडियन आर्मी में अर्दली थे। अंग्रेज गए तो दादा जी को एक गाडी दे गए। कहानी बहुत कुछ फ़िल्मी टाइप है। उस गाडी में दादाजी भिवानी बहल रोड पर बर्फ ढोते थे। वहीँ आते जाते गोलागढ़ गाँव के बंसी लाल  मुलाकात हुई तो उसका कुरता छोड़ा ही नहीं। घर के हाल खस्ता थे। आमदनी कुछ नहीं थी तो रायपुर तक रोजी रोटी की तलाश में चले गए। मूडी ऐसे कि   वहां सब बसा बसाया छोड़कर एक दिन वापिस गाँव भी आ गये। खुद पढ़े लिखे नहीं थे पर दो बातों का पता था एक पढाई की कीमत उस वक़्त घर के हर बच्चे को पढ़ाया। 1990 में जब मेरी बहन का एड्मिसन सरकारी स्कूल में हेडमास्टर ने सिर्फ इसलिए करने से मना कर दिया कि लड़की क्या करेगी लड़को के साथ पढ़के। तो दादाजी ही थे जिन्होंने बताया कि ये तो मेरी पोती है। मेरी बेटी ने बीएड की हुई है।

दूसरा दादा जी  की राजनीती की मामूली सी समझ। उन्हें इतना पता था कि नेताओ के आसपास रहने से बात बन जाती है। जब तक जिए बंसीलाल के साथ रहे। अपने अधिकतर बेटे बेटियों  नौकरी लगवाई। आज हमारे घर में सब ठीकठाक जगह सेट है। हमेशा ऐसा नहीं था। आज चाचा  फेसबुक पर रविश को कांग्रेसी कुत्ता और जाने क्या क्या लिख रहे है। उनसे ये पूछना ठीक नहीं रहेगा कि कोई दादा जी को कॉंग्रेसी  कुत्ता कहे तो कैसा लगेगा। इस देश की मिडल क्लास जनता को ज्यादा सीरियस नहीं लेना चाहिए।  वो सब एक नंबर के भोले और भुलक्क़ड हैं।  इन लोगों से किसी हवा तवा का बीच अंदाजा नहीं लगाना चाहिए। ये वोट डालते वक्त कॉंग्रेसी हो सकते है।

अब फेसबुक पर कहना आसान है। दूसरे को कहना आसान है। रविश को मैं जितनी आसानी से कह सकता हूँ उतनी आसानी से अपने चाचा को नहीं कह सकता। जितनी सहजता और आक्रामकता से मैं पापा की उम्र के और लोगो से बात  करता हूँ। उतनी पापा से नहीं कर पाउँगा। सारा प्रयास इसी सहजता को लाने का है। अपने चाचा को टोक सकते हो या नहीं ये अहम् बात है। रविश को टोकना भी उतना सरल नहीं है फिर भी अपने चाचा की अपेक्षा आसान है।

आज जितने लोग कांग्रेस को खान्ग्रेस , पप्पू , वगरैह लिख रहे है उनके खानदान की हिस्ट्री निकलवा लो।  सब कांग्रेस राज में मलाई खाये हुए मिलेंगे। व्यापारी , सरकारी अफसर , मिल्ट्री ऑफिसर सारे देशभक्त सब मिले हुए है जी। सुभाष चंद्रा  से लेकर मेरे चाचा , मामा  तक सब का उत्थान कांग्रेस के समय ही हुआ। तो इनकी बातों का ज्यादा बुरा नहीं मानना चाहिए।

जिन लोगों का कांग्रेस ने बुरा किया बहुत बुरा किया वो आज भी कांग्रेस को ही वोट देते है। उनकी समझ और हैसियत आज भी कांग्रेस विरोध की नहीं है।

एक तो आप और हम जो भला कर सकते है वो ये कर सकते है कि जनता पर अहसान  करना बंद कर सकते है। कोई अहसान वास्तव में है भी नहीं और अगर .000001 परसेंट है भी तो जनता को इस बात का अहसास नहीं होने का। अगर आपका अपना दिल खुश होता  तो लिखिए , अपना दिल खुश होता है तो और काम कीजिये। बस समाज और देश के लिए कुछ मत कीजिये। जिन्होंने आज तक किया है जनता को  उनका ही लिया दिया नहीं सिमट रहा है। जनता को जब अपना खुद का भला ही नहीं दिख रहा आपका अहसान कहाँ से  दिखेगा। ये अहसान वाले मोड़ से बाहर निकलना सबसे पहले जरुरी है। बाकी अपनी धुन में लगे रहिये। हम जो करते है अपने लिए करते है। अपने लिए ही करना चाहिए। मन मार कर की गयी भलाई किसी काम नहीं आती। मन कर रहा है बिजनेस करने का , फंसे हुए है समाज की सेवा में। तो दिन रात इसी बात का खटका लगा रहेगा कि वहाँ रहता तो इतना कमा जाते यहाँ समाज सेवा में तो इज़्ज़त भी नहीं मिल रही क्या फायदा हुआ। ज़िन्दगी बहुत बड़ी है। पहले फायदे वाला काम  कर लो ये समाज कहीं भागा थोड़ी जा रहा है ये तो सेवा करवाने के लिए यही खड़ा मिलेगा। कभी कर लेना। हमारे मोदी जी से सीखो पहले दुनिया के देशों को ही निबटा रहे है। सब निबट जायेंगे तो अपने पूरे मन से अपने देश की चौकीदारी ही करनी है देश कहीं भागा थोड़ी जा रहा है। समाज सबको सेवा का मौका दे देगा। समाज के पास पेशंस बहुत है







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