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Saturday, 17 June 2017

भारत माता की जय




कल रविवार है। भारत पाकिस्तान के बीच चैम्पियन ट्राफी का फाइनल मैच है। अभी पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। अब किसी तरह का रिस्क लेना मूर्खता की श्रेणी में आएगी। मैं बताना चाहता हूँ कि मैं तन मन (अगर धन होता तो वो भी लगा देता ) से भारत के साथ हूँ। मैं बचपन से ही भारत को जीतना देखता चाहता था। सेन्स ऑफ़ ह्यूमर , हँसी मजाक , व्यंग्य सब अपनी जगह पर जान है तो जहान है। जहान तो भारत पाकिस्तान भी है।  मैं तो जीजस के आगे भारत की जीत के लिए सुबह नारियल भी फोड़ूंगा। नारियल न फोड़ पाया तो अपना सर फोड़ूँगा। मैं तो चाह रहा हूँ कल भारत एक बार नहीं तीन बार जीत जाए। जान बड़ी चीज है भाई।


सहवाग कुछ भी नहीं है मैं बाप दादा के भी आगे जाना चाहता हूँ। भारत पाकिस्तान का पड़दादा है  बल्कि उससे भी कुछ आगे है। देशभक्ति को लोग आसान चीज समझते है इतनी आसान नहीं है आपको अपना दिमाग पाने घुटने से भी नीचे ले जाना पड़ता है। मैं कल से सोच रहा हूँ। भारत बांग्लादेश का दादा है और हमारी माता है ये तो गड़बड़ मामला हो गया। हमारा और बांग्लादेश का रिश्ता क्या कहलाता है। पर देशभक्ति तर्क के आधार पर नहीं लठ के आधार पर चलती है ,  मूर्खता के आधार पर चलती है। हम भारत माता की जय  भी बोलेंगे भारत को पाकिस्तान का बाप भी बोलेंगे। वैसे भी ये बाप बनने का मोह बड़े बड़े प्रगतिशील पत्रकार नहीं छोड़ पाते ये तो सहवाग है। एक फेमस फिल्म का डायलॉग है

रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते है

ये डायलॉग बहुत फेमस है भारत में। अब मैं इस डायलॉग के पीछे की मानसिकता पर गया तो लोग मुझे अतिवादी बोलने लगेंगे। जाने देते है। देशभक्ति के मौसम में अतिवाद नहीं करना चाहिए। कल फादर्स डे पर पाकिस्तान अपने बाप "जो कि हमारी माँ है" को चैम्पियन ट्राफी का तोहफा देगा। दोबारा फिर बताता हूँ। मैं बचपन से ही भारत को जिताना चाहता था। जब तक भारत की टीम क्रिकेट नहीं खेलती है मैं BCCI नामक क्लब की टीम को भी स्पोर्ट करने को तैयार हूँ। कोई दिक्कत नहीं है। वैसे पकिस्तान में कोई अच्छा दिमाग़ का डॉक्टर है तो कल अपने साथ सहवाग को भी लेकर जा सकते है। टीम  से बाहर होने से उनके दिमागी हालत जो बिगड़ी थी आज तक ठीक नहीं हुई है।

मैं फिर भटक रहा हूँ भारत जीतना चाहिए कल। कोहली को गाली देने का मौका भी मिलना चाहिए। हमारा कप्तान कोहली है बांग्लादेश का कप्तान मुर्तज़ा है जो कहता है वो कोई स्टार वतार नहीं है पैसे मिलने पर नाचने वाले कलाकार है। मज़दूर असली स्टार है। उन्होंने 1971 का जिक्र किया। उससे पहले के क्रिकेटर का जिक्र किया जो बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुआ था। भारतीय क्रिकेटरों से ऐसी उम्मीद करना बेमानी है। फिर भटक गया।

कल मैं क्लब की टीम का समर्थन करूँगा। जीतने पर विजय माल्या जो पार्टी देगा उसमें भले ही मैं शामिल न हो पाउ पर अपने पैसे किंगफिशर पीकर देशभक्त तो हो ही जाऊँगा। और जान बचेगी वो अलग से। मेरे तो घर में लेट्रीन बाथरूम है तो फ़िलहाल वहाँ भी खतरा नहीं है

बाकी कल जब आप भारत के लिए चीयर करेंगे तो अपने देश के उन नागरिको को भी जरूर याद रखियेगा जिनके लिए शौच एक भारी आफत बना हुआ है। शौच जाती महिलाओ के फोटो खींचे जा रहे है। देश के नागरिक इस बात का विरोध करने पर मारे जा रहे है। और ये सब एक ही देश में एक समय में ही हो रहा है।


1 comment:

  1. "भारत बांग्लादेश का दादा है और हमारी माता है ये तो गड़बड़ मामला हो गया। हमारा और बांग्लादेश का रिश्ता क्या कहलाता है"
    हा हा हा

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