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Thursday, 8 June 2017

तुम एक गोरखधंधा हो



कॉमरेड जब अपने परिजनों के दाह सँस्कार के लिए गंजा होता है। अपने माता पिता की चिता को अग्नि देता है।  पिंड दान करता है हरिद्वार अस्थि विसर्जन करता है तो वो उनकी इच्छा का पालन करता है। जबकि कॉमरेड को अच्छे से पता है कि मरने के बाद कोई इच्छा विछा नहीं होती है। जिन्दा इंसानो को   ही डेमोक्रेसी मिल जाये ये ही बहुत है। मरने से पहले आखिरी इच्छा जैसा ब्राह्मणवादी कॉन्सेप्ट को कॉमरेड अपनी ढाल बना लेता है। जब वो खुद मरता है तो उसके हाथ में वैसे ही कुछ नहीं रहता ना वो जीते जी ऐसा कोई उदारहण पेश कर के जाता है जिससे घर वालों को लगे ये अपने उसूलों के लिए पक्का था। फिर घर वाले अपनी इच्छा से उसका अंतिम संस्कार कर देते है। कॉमरेड 70 साल का भी हो जाता है तो भी घर वालों को ये ही लगता है कि एक खिलौना है जिससे खेल रहा है। कोई सीरियस बात नहीं है।

यही हाल शादी ब्याह के लिए होता है। जब खुद की होती है तो घरवालों की चाह ,इज़्ज़त और भावना अहम् होती है। घरवालों को दुखी नहीं करना। एक तो लव मैरिज कर ही रहे है शादी घर वालों की ख़ुशी से कर लेते है। या एक ही बार की बात है। दहेज़ भी ले लेते है। लड़की के पापा का दिल नहीं दुखाना। 24 कैरेट कुछ नहीं होता। आंधी में तना हुआ पेड़ सबसे पहले गिरता है। लचीलापन होना चाहिए। समाज में सारे काम करने पड़ते है दुसरो की ख़ुशी बहुत अहम् है। यही कॉमरेड जब अपनी बच्चो की शादी करता है तो डेमोक्रेट और लिबरल बन जाता है। बच्चों पर अपने असूल नहीं थोपने। बच्चे अगर धूम धाम से शादी करना चाह रहे है तो उनका लोकतान्त्रिक अधिकार है। अगर उनकी लड़की चाहती है कि कॉमरेड  कन्यादान के लिए खड़ा हो जाता। बीवी चाहती है तो कॉमरेड छलनी के सामने खड़ा हो जाता है।

इतनी क्यूटनेस अच्छी नहीं होती। कितना मुश्किल है अपना स्टैंड घर वालों को समझाना। घर वाले आराम से समझ जाते है अगर थोड़ी सी विल पावर हो। अपने पापा को ये बात कहनी कितनी मुश्किल है कि

"देखो ड्यूड मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ मैं कभी नहीं चाहूँगा कि आप कभी मरो पर चूँकि जीना और मरना कोई गीता ज्ञान नहीं है विज्ञान है  बॉडी एक्सपायरी डेट लिए आती है तो जब भी ऐसी स्थिति  आएगी तो मुझ से अंतिम संस्कार की उम्मीद मत रखना। दाह सँस्कार तुम्हारा  निजी विश्वास है मुझे नहीं लगता उसके करने से आपका कोई भला होगा। मैं अपने आप से झूठ नहीं बोल सकता। आप देख लेना अपना जुगाड़। "

बोल नहीं सकते तो लिख सकते हो। और कॉमरेड कोई श्रवण कुमार हो या घर के लिए इतना समर्पित हो ऐसा भी तो नहीं है। घरवाले तो बहुत चाहते है कॉमरेड शराब सिगरेट न पिए। बीवी तो बहुत चाहती है कॉमरेड अपनीं बेटी की उम्र  की लड़की से अफेयर न करे। पर वहाँ हम बहुत क्रन्तिकारी है। सारी क्रन्तिकारी ब्राह्मणवाद को टच करने पर ख़त्म हो जाती है।

और जो ये मेरे जैसे भाई है जो फेसबुक ने क्रांतिकारी बनाये है। उन्हें भी ये बात समझनी चाहिए कि समाज के भले की बात करना कोई गीता का ज्ञान देने जैसा नहीं है जैसे ही आप यहाँ आते हो। गरीब के समाज के भले की एक भी बात कहते हो आपकी जवाब देही भी शुरू हो जाती है। आप सवालों से बच नहीं सकते। आप नारी सम्मान की बात करते हो और हनी सिंह के गानो पर डांस करके उसकी विडिओ भी फेसबुक पर डालते हो और ये अपेक्षा भी करते हो कि आपके मनोरंजन पर सवाल नहीं उठेंगे ? अपनीं हर छोटी से आलोचना  पर "24 कैरेट 24 कैरेट " बोलकर व्यंग्य मजाक करने वालो को कब ये अहसास होगा कि भाई ये तो दशमलव जीरो एक प्रतिशत कैरेट भी नहीं है। आप अपने अश्लील मनोरंजन का विडिओ डालने के लोभ से भी मुक्त नहीं हो सकते तो 24 कैरेट का सवाल अभी कहाँ है ? अपनी कमजोरी अपनी हार तो माननी पड़ेगी। कम से कम ये ही परम्परा दे दीजिये आने वाली पीढ़ी को। अपनी हर सुविधा को तर्क और विचारधारा का जामा पहनना जरुरी नहीं है। ओके लव मैरिज की बढ़िया है आगे हमने ग़लती की या विपक्षी जायदा ताकतवर थे हम ज्यादा सुविधाभोगी। हमने हार मान ली। आगे फिर से कोशिश करेंगे। जब जागो तभी सवेरा है। शादी कर ली दहेज़ ले लिया। ज़िन्दगी ख़त्म थोड़ी हुई है। अपनी हार और कमजोरी को स्वीकार करो।  जितनी बार सवाल उठे उतनी बार बहानेबाजी और तर्कों की बजाय ईमानदारी से स्वीकार करो और आगे कोशिश करो।

और ये जो समाज से कटने का , बहिष्कार का तर्क है बहुत वाहियात है। समाज को कोई फर्क नहीं पड़ता आप किसी की मय्यत में , शादी में जाते हो या नहीं। समाज को आपके काम से मतलब है। आप खाली वक्त में बच्चो को पढ़ाते हो जिससे मिलते हो हंस के मिलते हो हर किसी को भाषण नहीं पिलाते। तो वो सब आपसे खूब मिलेंगे। किसी के मरने पर उसके घर खाली पिली 18 कप चाय पीने से ज्यादा इम्पोर्टेन्ट ये है कि आप उनके घरवालों के कुछ काम आये या नहीं।

ये सब छोटी छोटी बाते है पता नहीं क्या कन्फ्यूजन है इसमें। मुझे तो लिखते हुए भी शर्म आ रही है। सिम्पल सी बात है अपने आसपास वालो को अपनी विचारधारा समझाओ। अगर उसे सही समझते हो तो उस पर बने रहो। जीते जी ब्राह्मणवादी कर्म काण्ड में शामिल मत हो। मरने के बाद पुख्ता इंतजाम कर के जाओ कि ब्राह्मणवादी कर्मकांड न हो सके। अगर अब भी कन्फ्यूजन है तो एक गाने की दो लाइन लिखता हूँ उन्हें अपने जीवन में उतार लीजिये जीवन सफल हो जायेगा



छोटी सी ज़िन्दगी गहरी सी जेब है
बाकी तो जानेमन बातों के सेब है।

क्यों फ़ालतू टेंशन में पड़े हो।



3 comments:

  1. सभी यह बात बखूबी जानते हैं की टेंसन से अपना ही नुकसान होता है , फिर वही गलती बार-बार दुहराते हैं
    बहुत खूब

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  2. करारा जवाब

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