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Saturday, 3 June 2017

अखबार हाजिर हो - सेक्स से लेकर सौतन तक सब का समाधान - हमारा अख़बार




कई बार ऐसा भी होता है अख़बार में ऐसा कुछ होता ही नहीं है जिसपर बात की जाए। आज के अख़बार में भी ऐसा कुछ ख़ास  मिला नहीं। फ्रंट का आधा पेज तो भूकंप पर था। अब भूकंप पर क्या लिखूँ ? बैल जब सींग बदलते है तो धरती हिल जाती है। एनसीआर में बड़ी बड़ी बिल्डिंगे बनी है। इन सब पर बात भारत में तब होगी जब सलीके से भूकंप आ जाएगा। अभी तो बिल्ड़र देवता ज़िंदाबाद है। भूकंप आया तो तब की तब देख लेंगे। भूकंप से बचने के तरीके भी अख़बार ने सुझाये है। खैर अभी सब ठीक ठाक है डरने की जरूरत नहीं है। आगे की आगे देखेंगे। वैसे भी

होत वही जो राम रची राखा

बाकी मोदी जी तो परमानेंट हैं  ही फ्रंट पेज पर जैसे डीडीएलजे थी मराठा मंदिर में। मोदी जी कह रहे है दुनिया "अच्छे आतंकवाद , बुरे आतंकवाद " की बहस से बाहर निकले। बहस ही करनी है तो " गौ आंतकवाद " पर करो ये क्या अच्छा बुरा आतंकवाद लगा रखा है। उधर रामचंद्र गुहा जी ने इस्तीफा दे दिया। क्रिकेट पर क्या बात करे अब जब विराट कोहली अनिल कुंबले से लड़ाई कर रहा है। अब तो हम भी बूढ़े हो लिए वर्ना जब जवान थे तो अनिल कुंबले के फेवर में हमने "ताऊ आर्मी " बनाई हुई थी। इस विराट को तो ठीक कर देते हम ही। बस वक्त वक्त की बात है।

फ्रंट पेज की ही  एक और खबर है हरियाणा में जायेगी 1200 जेबीटी अध्यापको की नौकरी। अब नौकरी जाना भी कोई खबर हुई इस सरकार में ? वो भी फ्रंट पेज की ? समाचार वालो को बताओ खबर वो होती है जो अलग हो कभी कभी होती हो। किसी भाई को नौकरी मिली हो तो उसकी खबर लगाओ यार। नौकरी जाने की खबर वो भी फ्रंट पेज पर।

अब ऐसी खबर हो तो क्या तो बात करे। गुड़गांव क्राइम ब्रांच के एक हेड कॉन्स्टेबल ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से टोल टैक्स वाले पर  गोली चला दी। गोली कर्मचारी के कूल्हे पर लगी। अब हरियाणा पुलिस का निशाना तो अचूक है। वही लगी है जहाँ मारी है।  अब ये तो ख़बरें है बताओ।   हरियाणा पुलिस सदैव हमारे साथ है। उसकी खबर नहीं लेनी चाहिए। जो हुआ दुर्भाग्यपूर्ण है टोल वाले भाई को टोल टैक्स नहीं माँगना चाहिए था।

गाँव में लड़कियों का स्कूल न होने से लड़कियों को पढाई छोड़नी पड़ रही है। सरकार मास्टर हटा रही है। ठेके पर लगा रही है। लड़कियों को स्कूल जाने की पड़ी है। ये देशद्रोहियो जैसी बातें कहाँ से सीख जाते है बच्चे। दसवी तक पढ़ ली।  आने वालो के लिए दसवी तक का भी स्कूल नहीं रहना।

अख़बार में एक और कोना होता है जो मेरा सबसे फेवरेट है। खबर आये ना आये वो कोना कभी निराश नहीं करता। उस कोने का नाम है " क्लासीफाइड " अख़बार की पूरी कीमत वहाँ वसूल हो जाती है। भारत के कानून का क्या हाल है पता नहीं पर सभी अखबारों के क्लासीफाइड का हाल बहुत मस्त है। मैं आपको आजके अख़बार के आये क्लासिफाइड विज्ञापन पढ़वाता हूँ

" ज्योतिष : -गुरु ओमदत्त शर्मा कहते नहीं करके दिखाते है। एक घंटे में a to z समाधान। महागुप्त वशीकरण , प्रेम विवाह , सौतन ,दुश्मन छुटकारा , जादू टोना गृह क्लेश। अब पता नहीं गृह क्लेश करवाने की बात कर रहा है या मिटवाने की। साथ में नंबर भी दिए है " (ऐसी तक़रीबन 8 विज्ञापन अमर उजाला अख़बार में आये हुए है। बाकी अख़बार में भी आते ही होंगे )

"मित्रता : BOYS AND GIRLS INTERNATIONAL FRIENDSHIP CLUB .हाई प्रोफ़ाइल लेडीज गर्ल के साथ मीटिंग करके रोजाना हजारो कमाएं। (ईमानदारी बरतो , ईमानदारी पाओ ) बताओ दोस्ती के हजारो रूपये मिल रहे है आप है कि मोदी जी को गालियाँ दे रहे है। आगे नंबर दिया है मैं बताऊँगा नहीं।

आखिर में बाकायदा मेडिकल की हेडिंग के साथ अलग से विज्ञापन है सभी सेक्स से रिलेटिड है एक टैग लाइन है स्त्री के सामने लज्जित होने से अच्छा है आज ही इलाज करा के इंद्री एक से दो इंच लम्बी या मोटी करें। मुझे लिखने में शर्म आ रही है पर अख़बार में यही लिखा है। ऐसे तक़रीबन दस विज्ञापन है। डॉक्टर ऐ के जैन ने तो बाकायदा टीवी पर विशेष कार्यक्रम भी रखे हुए है जी न्यूज़ और ईटीवी उत्तर प्रदेश पर जैन साहब का प्रोग्राम आता है ये उन्होंने विज्ञापन पर बताया हुआ है। अब टीवी की ही मान लो। जिस देश का राष्ट्रीय पक्षी मोर है वहाँ ये विज्ञापन क्यों है समझ से परे है।

सभी विज्ञापन अख़बारों  में हर रोज आते है। पूँजी का नियम है एक पैसा खर्च तभी किया जाता है जब दस पैसे की कमाई हो। किस देश की जनता इन विज्ञापनों के बहकावे में आकर ठगी जाती है। किसकी जिम्मेदारी है। हमें तो एक ही पाठ बचपन में पढ़ा दिया गया है।

"सवारी अपने सामान की खुद जिम्मेदार है "

इससे आगे हमारे घुटनो पर ताला लगा के चाभी गंगा में बहा दी गयी है। अब हमारा दिमाग चाहकर हमारे घुटनो से सर तक नहीं आ सकता। वैसे आना भी क्यों है घुटने में क्या दिक्कत है। कम से काम एक आउटसाइड चांस तो है कि कभी घुटने बदलवाने पड़े तो दिमाग़  बदल जाए।









2 comments:

  1. अख़बार की मुख्य ख़बरें तो सही यहाँ हर ख़बर की ख़बर ली जा रही है..बढ़िया व्यंग्य

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