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Tuesday, 13 June 2017

सरकार हमने आपका नमक खाया है।



रेलवे कर्मचारियों की हड़ताल के लिए महान कवि शैलेन्द्र जी ने कविता लिखी थी हर जोर जुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है। उस कविता को गूगल पर सर्च किया तो उसकी शुरुवाती लाइने पढ़ने को मिली। 

हर ज़ोर जुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है 
मत करो बहाने संकट है , मुद्रा प्रसार इन्फ्लेशन है 
इन बनियों को लूटेरो को क्या सरकारी कंसेशन है ?


एक उर्दू के ग़ज़ब के शायर रहे अकबर इलाहाबादी। अकबर इलाहाबादी जी ने अख़बार का महत्व बताते हुए एक शेर लिखा था 
खींचो न कमानों को ना तलवार निकालो 
जब तोप मुकाबिल हो तो अख़बार निकालो। 

एक हिंदी की सबसे बड़ी हिट फिल्म का सीन है जब विलेन अपने चमचे से पूछता है कि वो उसे गोली क्यों ना मारे तो चमचा कहता है 

"सरकार हमने आपका नमक खाया है 

आज नमक और अख़बार मिलकर हड़ताल से जंग लड़ रहे है। भारत के सभी अख़बार किसके नमक पर ज़िंदा है ये बात कोई छुपी हुई नहीं है। कुत्तों के बाद नमक का हक़ अदा करने में अख़बार सबसे आगे है। बाकी पालतू जीवों को भी अखबारवालों से प्रेरणा लेनी चाहिए। मुझे अख़बार वालों से कोई शिकायत भी नहीं है। जिसकी खावे बाकली उसके गावे गीत। पर चूँकि अख़बार आम आदमी तक जाता है उसकी बेईमानियों को बताना हमारी मजबूरी बन जाता है। 
कल हरियाणा रोडवेज ने हड़ताल की। सभी अख़बार हड़ताल के नुकसानों और जनता की परेशानियों से भरे पड़े है। कभी  कभी लगता है हड़ताल से जनता से ज्यादा परेशान अखबार वाले होते है। हरियाणा रोडवेज को चाहिए था कि अखबार वालों के लिए एक दो बस चला देते। हड़ताल से होने वाले नुकसान का इतना सटीक आंकलन इतनी जल्दी करने वाले अखबारों पर 8 नवंबर से 31 दिसंबर तक ताले लगे थे। नुकसान की रोजाना आंकलन करने वाली इनकी मशीन को जंग लग गया था। 

हरियाणा सरकार निजी बसों को परमिट दे रही है। हरियाणा रोडवेज की सेवाओं के तो दूसरे प्रदेश वाले भी कायल है। निजी क्षेत्र की बसों की लूट से कौन वाकिफ नहीं है। अगर हरियाणा रोडवेज बंद होती है तो उसी जनता को हर रोज कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा इसका अंदाजा अखबार वाले नहीं लगायेंगे , हरियाणा की जनता को लगाना पड़ेगा। हिसार से दिल्ली कभी से प्राइवेट और सरकारी दोनों बस चलती है। हरियाणा रोडवेज की बसों का इतना प्रभाव है कि लोग इन्तजार कर लेंगे पर जाएंगे हरियाणा रोडवेज की बस में ही। 

अख़बार को उनके नमक का हक़ अदा करने दीजिये। रेलवे के स्टेशन बेचे जा रहे हैं  , रोडवेज बेची जा रही है। और देश बेचना किसे कहते है। जनता को ये बात समझने की जरुरत है हड़ताल जनता के लिए ही की जा रही है। सरकारी कर्मचारी कोई दूध के धुले नहीं है वो भी इसी समाज से आये है पर फिर भी निजी क्षेत्र से वो लाख गुना बढ़िया है। अपनी बस , अपने स्कूल , अपने रेल हमें ही बचानी है। अगर इन अख़बार और टीवी वालो के सहारे रहे तो साहिर का ये गाना ही रहेगा गुनगुनाने को बस 

चीन ओ अरब हमारा , हिन्दोस्तां हमारा 
रहने को घर नहीं है सारा जहाँ हमारा 

जो लोग किसानो को अराजक बताकर उनकी आलोचना में लगे है उन्हें भी साहिर सुनने की जरूरत है 

जेबें है अपनी खाली , क्यों देता वरना गाली 
वो संतरी हमारा , वो पासबाँ हमारा। 

साहिर सुनने की सलाह मासूम लोगो को दी गयी है  जिन्हे सच्चाई का सच में पता नहीं है।  जो लोग सरकार के दलाल है या मिडल क्लास है और दलाली उनके  स्वभाव में आ गयी है वो अपने मुंह से गोबर करते रहे। भारत वालों को आदत है। स्वच्छ भारत टैक्स लगा हुआ है तो गोबर करना बनता भी है। उनके लिए मैं नमक हलाल का गाना   छोड़े जा रहा हूँ 

आप अंदर से कुछ और , बाहर से कुछ और नजर आते है। 
बर्खुरदार शक्ल से तो आप चोर नजर आते है 

5 comments:

  1. सारी बातें इस तरह लिखी हैं आपने कि कुछ लिखने के लिए बचा ही नहीं

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    1. ये पोस्ट लिखते वक्त बहुत गाने और कविता याद आयी मुझे

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    2. This comment has been removed by the author.

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    3. पोस्ट में भी कई शामिल की हैं आपने और ये बड़ी बात है कि सब पोस्ट को वज़न दे रही हैं।

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