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Saturday, 10 June 2017

सब माया है


आत्मा अजर है अमर है
न कोई मरता है न कोई मारता है
सब माया है
ना जमीन किसी के नाम है
ना किसी के पास काम है
ना कोई खास है न आम है
राजा खामखाह बदनाम है
मुल्क में चैन है आराम है
आगे तो राम का नाम है
ना कोई रोटी खाता है
ना कोई गोली खाता है
ना कोई पेरिस जाता है
ना कोई फाँसी खाता है
जो आता है वो जाता है
कोई भारत भाग्य विधाता है
किसान का बेटा सिपाही है
गोली उसी ने चलाई है
अखबार में खबर आई है
बाप उसका बलवाई है
सरकार ने नरमी दिखाई है
शर्म उनको मगर नही आई है
सब मक़तूल हैं  सब कातिल हैं
सब फर्जी हैं  सब बातिल हैं
भूखे हैं  जो भी नाकाबिल हैं
देशद्रोह में वो ही शामिल हैं
मेरिट में हैं  जो काबिल हैं
काबिल को सब कुछ हासिल है

सब माया है

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