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Saturday, 17 June 2017

जनाब टट्टी कर सकते है क्या

प्रगतिशीलता की क्लास   मैं काफी सालों से क्लास की खिड़की के बाहर खड़ा होकर ले रहा हूँ। कोई अँगूठा माँगने न आ जाए इसलिए दोनों अँगूठे  मैं फेसबुक पर छोड़कर क्लास के बाहर खड़ा होता हूँ। बहुत बार मास्साब ने मेरे अंगूठे लेने की कोशिश की पर भारी नाकामी हासिल हुई। तो गुस्सा में गाली देकर मुझे छोड़ दिया। मैं बदतमीज फिर कान लगाकर खिड़की के बाहर खड़ा हो जाता हूँ।
प्रगतिशीलता की एक क्लास बहुत ज्यादा रोचक थी। उसमें सिखाया गया था कि प्रगतिशील पोस्ट शुरू कैसे की जाए। मासाब बता रहे थे कि अगर सारी फेसबुक किसी मुर्ख नेता के बेवकूफी भरे बयान में उलझी हो तो ये किसी भी प्रगतिशील पोस्ट के लिए एक सुनहरा अवसर है। प्रगतिशील लोगो पर व्यंग्य या ताना मारे बिना शुरू हुई प्रगतिशील पोस्ट उतनी प्रगतिशील नहीं मानी जाती।

आज हर जगह योगी जी की चर्चा है वो लोग जो बहुत सी बातों को व्यर्थ मानते है वो भी उस बयान में व्यंग्य कर रहे है  फ़िलहाल तक ऐसी कोई पोस्ट नजर भी नहीं आयी है जो ये कहती हो कि यहाँ आरएसएस ने फेसबुक को योगी जी के बयान में उलझा दिया वहाँ चोरी छुपे इतना बड़ा काण्ड हो गया। स्टेशन बेच दिए या अलाना फलाना कर दिया गोया सरकार के सबसे बड़ा खतरा फेसबुक ही हो जिसे बरगलाने के लिए उसे षड्यंत्र रचने पड़ते है। गोया योगी अगर हमें इस तरह नहीं बरगलाता तो अब तक तो हमने सरकार की ईंट से ईंट बजा दी होती। खैर अभी तक किसी ने ऐसी पोस्ट नहीं की तो ये श्रेय मुझे मिल जाना चाहिए।

योगी जी को जाने देते है। ठाकुर लोग के मुंह नहीं लगना चाहिए शास्त्रों में लिखा है। हरियाणा में नूंह जिले में डीसी   मणिराम शर्मा स्वच्छ भारत अभियान के पीछे हाथ धो के पड़ गए है। तीन चार दिन पहले सलम्बा गांव के तीन चार लोगो को बाहर शौच करते पकड़ा। डीसी के शब्दों में कहे तो उनकी अकड़ निकाली। जुर्माना किया। डीसी की माने तो सब खाते पीते घर के थे बेवजह खेतो को गन्दा कर रहे थे। मुझे भी गुस्सा आ गया सपने में मैं सालाम्बा गांव पहुँच गया। हरियाणा का वो बदनाम इलाका जहाँ सरकारी लोग जाने से डरते है। गुंडागर्दी है। जान से मार देते है। सपने में जान से जाने का खतरा नहीं रहता तो मैं वहाँ पहुँच गया। मकसद एक ही था  स्वच्छता के दुश्मनो को ललकारना। पर कई बार सपने भी बेकाबू हो जाते है। इससे आगे सपने ने अपनी कहानी खुद गढ़ी।

गाँव के अंदर जाने वाला रास्ता कच्चा है। कीचड़ ही कीचड़। वहाँ कभी सड़क नहीं बनी। अगर जाना है तो कीचड़ में से होकर जाना पड़ेगा। स्वच्छता के दुश्मन इस्लाम नामक बुजुर्ग के घर जाने तक मेरे दोनों पाँव कीचड़  में भर चुके थे। इतना गुस्सा था कि सोचा था अपने पांव उसकी कोठी के कालीन से साफ़ करूँगा। पर जो चीज हकीकत में होती है सपने में नहीं होती। सपने में वहां कोई कोठी नहीं थी। बमुश्किल 30 गज में बना इस्लाम का घर आधा गली की नाली के ऊपर बना था। जैसे ही मैं घर में घुसा घर ख़त्म हो गया। दो छोटे कमरे जिसमे से एक मे तुड़ी रखी थी आदमी बमुश्किल खड़ा हो सके इतना नहानघर , रसोई कही दिखी नही । इतने में 5 परिवार रहते थे । इस्लाम जी खुद उनकी पत्नी और चार शादी शुदा बेटे ।इस्लाम जी बाहर गली में बैठे हुए थे। मैं उनसे स्वच्छता अभियान को गन्दा करने के लिए गालियाँ देने आया था पर उनके  घर तक पहुँचने में मैं खुद गन्दा हो गया था।  मेरी समस्या थी कि खुद कैसे साफ़ होउ। इस्लाम जी से पाँव धोने के लिए पानी  माँगा तो पता चला गांव में पानी की बहुत समस्या है। गांव की गलियों में पानी ज्यादा खड़ा है बनिस्पत घरो के घडो में होने के। बिना पानी स्वच्छ कैसे हो। इस्लाम जी से बात की तो उन्होंने अपना घर दिखा कर हमसे पूछा कि बताओ इसमें कहाँ लेट्रिन बनाये। पुलिस वाली मेडम तो कहती है इस गली वाली नाली के ऊपर बना लो। जो गंदगी खेतों में नहीं कर सकते उसे गांव में अपने घर में कर लो।

मैं सपने में ज्यादा देर रह  नहीं सका। कुछ देर के लिए बाहर आना पड़ा। ये कैसा समय आ गया है सपने से ज्यादा हकीकत में सकून मिलता है। हकीकत में हमने इतने झूठ फरेब भर दिए है कि सपनों को हकीकत दिखाने के लिए मज़बूर होना पड़ा है। सपना मुझे वापिस उस गाँव में लेकर गया जो हरियाणा के उस इलाके में था जहाँ शरीफ लोग जाने से डरते है। जिसमें अधिकतर आबादी मेहनत मजदूरी पर निर्भर थी। जहाँ हरियाणा के किसी भी और गाँव की तरह औरते आदमियों से ज्यादा काम करती थी। एक पोस्ट  में पूरा सपना संभव नहीं है। बाकी सपना अगली पोस्ट में बताता हूँ।

फ़िलहाल डिप्टी जी को फेसबुक पर गरीब मजदूरों की अकड़ निकालंने के लिए बधाई देने जा रहा था पर उन्होंने अपनी पोस्ट डिलीट कर ली। डीसी बहुत बड़ा नाम होता है. हरियाणा में कोई अकड़ता है तो कहा जाता है
"घणा डीसी ना पाके "

उनको पोस्ट डिलीट नहीं करनी चाहिए थी। पोस्ट डिलीट करने से कुछ होता भी नहीं ना। सबके पास स्क्रीन शॉट होते है। अपनी जुबान पर कायम रहना चाहिए। पोस्ट डिलीट करके क्या हासिल होगा

(बाकी अगली पोस्ट में )



1 comment:

  1. "ये कैसा समय आ गया है कि सपने से ज़्यादा हक़ीक़त में सुकून मिलता है"
    ये एक लाइन इस पोस्ट का सार है

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