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Wednesday, 31 May 2017

बात बलात्कार की नहीं समाज के रवैये की है

                           

हरियाणा के  अलग अलग सूबे की चार खबरें है 

एक लड़की अपने घर से भाग गई क्यूंकि उसका बाप उसका बलात्कार करना चाहता था। लड़की की उम्र 17 साल है। वो जिस बन्दे को रेलवे स्टेशन पर मिली उसने बलात्कार का एक रैकेट बना दिया। लड़की को रेप करने वालो में 20 साल से लेकर 60 से ऊपर वाले मर्द शामिल है। एक तो बाप बेटे का जोड़ा ही है। 

ईंट के भट्टे पर काम करने वाली दम्पति की 5 साल की लड़की का घर में घुसकर उस वक्त रेप कर दिया जब लड़की के माँ बाप तथाकथित सभ्य समाज के घरों के लिए ईंट बना रहे थे। 

एक सौतेले बाप ने 7 साल की लड़की का बलात्कार किया 

दो नाबालिगों का बलात्कार हुआ घर में ही। 

पसीने से , आँसू से बच्चे पैदा करने वाले देश की हकीकत यही है। और हम इसी हकीकत से मुंह फेर कर हर रोज सो जाते है। फेसबुक आया है तो रो भी लेते है। पर मोटामोटी हमें ज्यादा फर्क नहीं  पड़ता। मुलायम ने कहा था लड़के है ग़लती हो जाती है। इसकी आलोचना बहुत लोगों ने की पर इस देश का सच तो यही है। बलात्कार या ऐसे ही किसी अपराध के लिए हमारे दो रूप है दो स्टैंड है और दोनों बहुत क्लियर है। अगर बलात्कार करने वाले से हमारा कोई लेना देना नहीं है तो हमारा गुस्सा देखते ही बनता है। लिंग से लेकर सर तक काटने की हिमायत करते है। हमारा रिएक्शन इतना एक्सट्रीम होता है कि लगने लगता है इस देश में जहाँ इतने संवेदनशील लोग रहते है वहाँ ये बाते कैसे हो जाती है। 
पर अभी तस्वीर का दूसरा पहलु भी है। भारत भले ही देव भूमि हो पर यहाँ भी सब कुछ वैसे ही वैज्ञानिक रूप से ही होता है जैसा दूसरे देशो में होता है। बलात्कार करने वाले ना तो धरती फाड़कर पातळ में से निकलते है न ही पुष्पक विमान में बैठकर इंद्र की सभा में से आते है। ये हम सब लोगो में से ही है। बल्कि हम ही लोग है। हम हर रोज बलात्कार को बढ़ावा देने वाली हरकतें करते है। किसी को जबरन शारीरिक चोट पहुँचाने की मानसिकता कोई एक दिन में नहीं आ जाती। लड़कियों के लिए हमारा रवैया इतना ज्यादा ढुल मुल और पक्षपातपूर्ण है कि बलात्कार करते वक्त ज्यादा सोचना नहीं पड़ता। कॉलेज में सड़को पर लड़कियों को छेड़छाड़ इग्नोर की जाती है। हर गाली बलात्कार का प्रतीक है हम हर रोज अपनी बोली से जाने कितनी बार बलात्कार करते है। गाली तक छोड़ने के लिए हम तैयार नहीं है बल्कि प्रगतिशील लोगो के पास तर्क है। गालियों से शुरू हुआ सिलसिला बलात्कार पर जाकर रुकता है ये समझना कितना मुश्किल है ? ऊपर लिखी चार घटनाये घरो में ही हुई है। क्या और किसी घर में ये घटना नहीं होती होंगी ? सजा , केस , जेल तो जाने दीजिये, विश्व गुरुओ के देश में किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती कि उस आदमी का व्यक्तिगत रूप से ही बहिष्कार कर दे। दस साल की उम्र में लड़की का बलात्कार करने वाले चाचा ताऊ फूफा लड़की की शादी में उसे आशीर्वाद देते मिलते है मान लेते मिलते है। जब बात अपने घर की आती है तो सबके पास एक ही तर्क  होता है 

"ग़लती हो जाती है "

पिछले दिनों एक बहुत बड़े प्रगतिशील भाई ने अपनी प्रेमिका की फोटो उसके घरवालों को भेज दी थी। चूँकि बात प्रगतिशीलता और दोस्ती की थी तो ग़लती हो जाती है। अपराध ग़लती बन जाता है। मैं उस प्रगतिशील युवक का स्पेशल अध्ययन करना चाहूँगा जिसके दिल में ये ख्याल आया होगा कि प्रेमिका के साथ अंतरंग फोटो उसकी माँ या पापा को भेजी जा सकती है। और फिर सॉरी बोलकर काम चल सकता है। मैं उस स्कूल का नाम भी जानना चाहूँगा जहाँ वो पढ़ा होगा। मेरी इच्छा उसकी कास्ट जानने की भी है। मेरे दोस्तों को वाजिब शिकायत है कि मैं हर बात में कास्ट की ले आता हूँ। हर बात पर नहीं लाता। मैं सिर्फ जातीय अहंकार से बीमार लोगो को उनकी जाति के सही आंकड़े इकट्ठे करने में मदद कर रहा हूँ। राजदीप सरदेसाई जिन्हे प्रगतिशील और नए विचारो का कहा जाता है। उनमे इतनी हिम्मत आ जाती है कि सारी प्रगतिशीलता भूलकर विपक्षी खेमे के सुरेश प्रभु , मनोहर परिकर के मंत्री बनने पर बैंड बजाने पहुँच जाते है सिर्फ इसलिए कि वो उनकी कास्ट के है तो  हमें भी उनके हर कारनामे पर उनकी कास्ट बतानी पड़ेगी। पर लोगो को ऐतराज है इसलिए आगे से मैं कास्ट कास्ट नहीं करूँगा सिर्फ सरनेम से काम चला लूँगा। 

बात बलात्कार समर्थित विचारधारा की हो रही थी जिसके हम सब पोषक है। फेसबुक के बौद्धिक लोगो में जगह बनाया एक गुण्डा  सरे आम लड़की को गालियाँ दे सकता है क्यूंकि उसे पता है ये सब बिना रीढ़ की हड्डी के लोग है। इनके पास विचार ही विचार है धारा कोई नहीं है। उन विचारो को ये कहीं भी फिट कर सकते है। बीजेपी समर्थको की गालियों पर रोने वाले गालियों की प्रशंसा में वीर रस के गीत लिख सकते है। बहुत से तो ऐसे प्रगतिशील है जिनकी ज़िन्दगी का एक ही नियम है एक ही धारा है कि जिस से हमारी लड़ाई हुई है वो किस तरफ है वो अगर गालियों के पक्ष में है तो हम खिलाफ हो जायेंगे। वो अगर बलात्कार के खिलाफ है तो हम पक्ष में हो जाएंगे। वैसे ये तरीका ज्यादा बुरा नहीं है क्यूंकि इसमें दिमाग़ पर जोर डालने की जरूरत ही नहीं है। तर्क ? तर्क तो वही दस है उन्हें किसी भी बहस में पक्ष या विपक्ष में बड़े आराम से पेश किया जा सकता है। जो मुलायम ने कहा वही किसी प्रगतिशील ने कहना होगा तो वो तीन पेज लम्बा आर्टिकल लिख देगा उसमे दुनिया भर से कोट डाल देगा। मतलब वही होगा 

लड़को से ग़लती हो जाती है। 

जो शातिर धूर्त लोग है उनसे बात करना बेकार है। लातो के मर्द बातों से नहीं मानते। पर जो सच में संवेदनशील है जिनकी आँखों में आँसू है उनसे इतनी अर्जी की ही जा सकती है। गालियाँ मत दीजिये जहाँ हो सके रोकिये , टोकिये। जहाँ लड़कियाँ नहीं होती वहाँ गालियाँ ज्यादा दी जाती है। गालियों के मनोविज्ञान की बजाय उनकी राजनीति और उनका प्रभाव समझिये। किसी के लिंग काटने से बलात्कार नहीं रुकने वाले , वो हमारी मानसिकता में बदलाव से रुकेंगे। लड़कियों की हर जगह भागीदारी से रुकेंगे। उनकी आजादी से रुकेंगे। और जो हमारी महान संस्कृति की बात करता है उन सब को ये अख़बार ये घटनाएं हर रोज दिखाने की जरुरत है। उन्हें साहिर सुनवाने की जरुरत है 

"जरा इस मुल्क के रहबरों को बुलाओ 
ये कूचे ये गलियां ये मंजर दिखाओ 
जिन्हे नाज है हिन्द पर उनको लाओ "

Tuesday, 30 May 2017

आडवाणी अयोध्या के अलावा खबर और भी है



कल ही अख़बार पर लिखना शुरू किया आज ही अख़बार देर से आया। देर हुई आने में लेकिन शुक्र है कि अख़बार आया तो। अख़बार में खबर है कि सोनीपत के प्रॉपर्टी डीलर के पास एक करोड़ के पुराने 1000 और 500 के नोट मिले है।  पुराने नोट 95 परसेंट उन मायावी दो महीनो में ही सरकार की टकसाल में वापिस पहुँच गए थे। अभी भी लोगो के पास मिल ही रहे है। सवाल इतने है जवाब किसी ने देना नहीं है। अगर पुराने नोट अभी भी लोगो के पास है तो सरकार के पास कौन से नोट पहुँचे ? कहीं ऐसा तो नहीं सरकार ने नकली नोट ले लिए लोगो से और नए नोटों में पेमेंट भी कर दी। नकली नोटों की कमर तोड़ने के लिए सरकार ने खुद ही तो नकली नोट नहीं खरीद लिए। ये डीलर लोग अभी भी एक करोड़ पुराने नोटों को क्या कर रहे है ? जनवरी फरवरी तो महीने सर्दी के ही होते है। हमने सुना है नोटों में बहुत गर्मी होती है पर कभी हाथ सेंक कर नहीं देखे। मुझे तो ये सब  देख पढ़कर नुसरत फ़तेह अली खान ही याद आ रहे है 

तुम एक गोरखधंधा हो। 

ये गाना नोटबंदी के लिए ही लिखा गया है शायद। 

एक यमुनानगर की खबर है। लिव इन में रह रही एक युवती ने बलात्कार का केस किया था युवक पर। यॉर ऑनर ने केस डिसमिस कर दिया है। लड़की बालिग है , मर्जी के साथ युवक एक साथ रह रही है तो फिर दुष्कर्म कैसा ? लड़की की ग़लती थी उसे बालिग नहीं होना चाहिए था। भारतीय मर्द से वफ़ा की उम्मीद अपने आप में एक मृग तृष्णा है। बालिग हो अपनी मर्जी से रहती तो बलात्कार नहीं हो सकता। शादी में बलात्कार नहीं हो सकता। मैं तो बोलता हूँ ये चोंचले है लड़कियों के। मेरा के पुराना दोस्त कहता था कि बलात्कार जैसी किसी चीज का आस्तित्व ही नहीं है। बिना लड़की सहमति के उसके साथ सेक्स किया ही नहीं जा सकता। ये भी कहता था वो कि लड़की सेक्स ज्यादा चाहती है। बलात्कार वलात्कार कुछ नहीं होता। ये सब भोले भाले लड़को के पेट में भाले घोंपने के लिए लड़कियां षड्यंत्र रचती है। त्रिया चरित्र को कौन समझ पाया है हमारे शास्त्रों में लिखा है ये। मासूम लड़के को पहले लड़की ने अपने प्यार के जाल में फँसाया। साथ रहे। बाद में लड़के को अहसास हुआ कि ये तो ग़लत है उसने शादी दूसरी लड़की से कर ली। लड़के मासूम होते है। लड़कियां बदमाश। प्रूव्ड फैक्ट है। अभी आप कहेंगे कि देखो ये लिव इन वाला कॉन्सेप्ट ही बेकार है। शादी करनी चाहिए बाकायदा। जैसे भारत के मर्द शादी  के रिश्ते को मानते है। जैसे शादी के बाद वो दूसरी लड़कियों पर लार नहीं टपकाते। दिक्कत शादी या लिव इन नहीं है भाई। दिक्कत हमारा समाज है जहाँ लड़कियों की आजादी के लिए जगह ही नहीं है। हर जगह वही विश्व गुरु वाली मानसिकता है। लड़कियाँ शादी में रहे , लिव इन में रहे या अकेले रहे , उन्हें  लोकतान्त्रिक अधिकार है या नहीं ? पड़ोस के लड़के तक उन्हें अपनी प्रॉपर्टी मानने लगते है। घर के लोगो की तो बात क्या कहे। मसला भारतीय समाज को डेमोक्रेसी सिखाने का है। 

बीच के पेज में कही खबर है पतंजलि के 40 फीसदी प्रोडक्ट्स क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए। पिछले महीने सेना की कैंटीन ने पतंजलि के आंवला दिव्य जूस पर बैन लगा दिया था। बताओ अब ये तो हाल है। देशभक्ति प्रोडक्ट्स को भी फेल पास करने लगे ये। मैं रामदेव जी के साथ हूँ। मैं तो अब गोबर खाने के लिए भी मेंटली तैयार होने लगा था। अब ये खबर निराश करती है। "देश के लिए " के लिए ही बात आ गई तो क्या पास क्या फेल , प्यार महोब्बत दिल का खेल । 

एक छोटी सी खबर ये भी है कि अभिजीत नया ट्वीटर अकाउंट भी सस्पेंड कर दिया। ये क्या बात हुई। इसकी तो कड़ी निंदा होनी चाहिए। इस देश में देशभक्ति प्रोडक्ट्स बैन हो रहे है। देशभक्तो के अकाउंट्स सस्पेंड हो रहे है अच्छे दिन कहाँ है भाई। 

फ्रंट पेज की खबर है राज्य सरकार ने तीन गाँवों के नाम बदले है। तीन गाँव गंदा , किन्नर और चमारघेड़ा के नाम बदलकर अजित नगर , गैबी नगर और देव नगर कर दिए है। अभी बहुत से नाम और बदलने है।  कुत्ता गढ़ का नाम प्यार नगर रखने की सिफारिश की है। ये नाम इन गाँवों के कैसे पड़े ये पता लगाना एक दिलचस्प स्टोरी हो सकती है। 

 फ्रंट पेज की ही एक और खबर है 90 परसेंट युवाओ के तनाव का कारण माँ बाप है ऐसी रिसर्च की है महर्षि दयानन्द यूनिवर्सिटी ने। बेसिरपैर की उड़ाते रहते है ये लोग भी। 

बाकी सब रूटीन सरकार के विज्ञापन थे। 

कल फिर आऊंगा अख़बार लेकर आपके पास 
अमोल सरोज स्टेटस वाला 

शराब का कसूर है सब। हम बहुत बेक़सूर है बचपन से

                             

आज शराब विशेष चर्चा में हैं दो मुख्तलिफ कारणों से।  यूपी में एक महिला मंत्री ने एक बियर बार का उद्घाटन किया जिसकी फोटो मजाक और व्यंग्य फेसबुक पर चर्चा में है।  दूसरी तरफ दिल्ली के मुखर्जी नगर में कथित रूप से दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले गुंडों ने एक ई रिक्शा चलाने वाले को इसलिए ईंटो से पीट पीट कर मार दिया क्योंकि रिक्शा चालक ने उन गुंडों को खुले में पेशाब करने  से मना किया था। यहाँ भी शराब शामिल है क्योंकि उन गुंडों के हाथ में बियर की कैन थी। 

मुखर्जी नगर ,जहाँ वो गुंडे कथित तौर पर रहते थे,  पूंजीवादी लूट और शोषण का जीता जागता नमूना है  यहाँ  पूरे देश से बच्चे सरकारी नौकरी की तलाश में आते है। छोटे छोटे दड्बो में रहते है महँगी कोचिंग लेते है। कुछ को नौकरी मिलती है शराब तो सब को मिल ही जाती होगी। मुखर्जी नगर के आसपास सिर्फ नौकरी के सपने पूरे करने वालो को सोने के लिए थोड़ी सी जगह देकर लोग करोड़पति बन गए। स्वस्थ पूंजीवाद और कस्टमर इज किंग का राग गाने वालो को मुखर्जी नगर , लक्ष्मी नगर , पांडव नगर जरूर घूम कर आना चाहिए। जहाँ एक छोटे से कमरे का किराया 7000 मिलेगा ऊपर से टर्म्स एंड कंडीशन अलग। पूंजीवाद बोलता है कि जिसके पास पैसा है उन सब के पास समान अवसर है।  क्या ऐसा सच में है ? अभी परसो का मजेदार किस्सा बताता हूँ। हमें द्वारका में एक फ्लेट की जरूरत थी। प्रॉपर्टी डीलर के पास पहुंचे। पहला सवाल किया कि  आपकी जॉब कहाँ है ? मैंने कहा - कहीं नहीं। उसने कहा ," फिर तो बहुत मुश्किल है द्वारका में अधिकतर मकान मालिक उन्हें ही मकान किराये पर देते है जो शादीशुदा हो और दोनों वर्किंग हो। " मेरा कहने का दिल हुआ रात भी किसी फुटपाथ पर गुजार लेंगे। आप अकाउंट नंबर बता दो बस। क्या एक सिंगल लड़की जो इंडेपेंडेंट है जिसके पास पैसे है मकान किराया पर लेना  आसान है ? और एक तलाकशुदा लड़की के लिए ? दलित के लिए ? अगर आपका जवाब हाँ है तो आपको अपने समाज के बारे में कुछ भी नहीं पता है। लड़कियों की आजादी के रास्ते में दुनिया भर की बंदिशे लगी है जो खुली आँखों से नहीं दिखती।  आर्थिक आजादी के बावजूद आधारभूत हको के लिए लड़ने में ज़िन्दगी चली जाती है। तलाक शुदा है बच्चा है। कौन कौन आएगा घर में ? माहौल ख़राब होगा। दरअसल वो कहना चाहते है कि अच्छा तलाक ले लिया अच्छा शादी नहीं करोगी। घरवालों को कन्विंस या लड़ाई करके समझ रही हो सब जीत लिया। हम आपको रहने के लिए मकान नहीं देंगे। बात करने को साथी नहीं देंगे। हम इतने एब्नॉर्मल है कि अंत में आपको ही एब्नॉर्मल घोषित कर देंगे। 
मेरे साथ ये बड़ी दिक्कत है मैं बिना शराब पिए लिखूं तो भटक जाता हूँ। शराब पर लिखना था मुखर्जी नगर से द्वारका पहुँच गया। हाँ तो वो गुंडे जिनके बारे में बताया जाता है कि दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ते थे और मुखर्जी नगर में रहते थे। मेरी दिली इच्छा रहती है ऐसे हर केस में मारपीट करने वालो की कास्ट सबसे पहले बताई जाए और बाकायदा उस जाति की धर्मशाला में उनके नाम सुनहरे अक्षरों में लिखवाये जाए ताकि अपनी जाति पर गर्व करने वाले लोग अपने हिस्से की शर्म भी साथ लेकर सो सके। दिन में डेढ़ बजे की ये घटना है और रिक्शा चालक को रात में पीटा जाता है। ये शराब के नशे का काम तो बिलकुल नहीं है।  मर्द  , जाति और बल का नशा होने की सम्भावना सबसे ज्यादा है। और ऐसा नहीं है कि हमारे सामने ये सब होता नहीं है। मामला समझदारी और नासमझी का है। मेरी ज़िन्दगी में कम से काम तीन से चार वाकये ऐसे हुए है जिनमे मैंने समझदारी का सहारा लिया और आज मैं न केवल ज़िंदा हूँ बल्कि लिख भी रहा हूँ। एक वाकया अभी 20 -25  दिन पहले का है।  दिल्ली जाने के लिये सुबह साढ़े चार बजे घर से निकला था । यूनिवर्सिटी के गेट नम्बर दो पर दस पन्द्रह मिनट ऑटो का इंतजार कर के पैदल ही मलिक चौक के लिये निकल पड़ा । तकरीबन 300 - 400 मीटर चलने पर आगे देखा चार बन्दों ने बीच सड़क पर गाड़ी रोकी हुई है और चारो दिशाओं में सड़क के बीच मूत्र विसर्जन मतलब पेशाब कर रहे थे । मैं समझदार बिना टोके कोने से होकर निकल गया । चारो नशे के धुत थे एक उनमे से गाड़ी भी चला ही रहा होगा। पेशाब करते हुए को टोकना समझदारी नही है ।सड़क मेरा घर नही था अगर दारू में धुत मर्दों का टोला मेरे घर के दरवाजे पर भी पेशाब करेगा तो भी मैं टोकने से पहले दो बार सोचूँगा। ग़लत काम पर टोकना नही चाहिए पागल पीछे पड़ जाते है और घर से बाहर जाओ तो लाठी साथ लेकर चलना चाहिए कुत्ते पीछे पड़ जाते है  फेसबुक का हाल भी इससे जुदा नहीं है। जो फेसबुक को आभासी दुनिया मानते है वो बहुत बड़ी गफलत में है। फेसबुक हमारे समाज का आइना है। बिलकुल साफ़ आइना। हमारे समाज को इतना साफ़ असलियत में भी नहीं देखा जा सकता जितना फेसबुक पर देख सकते है। 

मैं फिर भटक गया। बात शराब की हो रही थी। शराब के नशे की हो रही थी। मुझे निजी तौर पर लगता है शराब पर गरीब मार हो रही है। शराब की आड़ में हिन्दू समाज के सभी उन नशो को छुपा लिया जाता है या बचा लिया जाता है जो ने केवल अमानवीय है बल्कि अब तो गैर क़ानूनी भी है। जाति का नशा ,  मर्दवाद का नशा सबके नशे को शराब पर थोपकर सबको पतली गली से बचा लिया जाता है। जब से थोड़ी बहुत सभ्यता डेमोक्रेसी आई है लोगो ने अपनी पत्नियों को पीटना बंद करना पड़ा है उसे ठीक नहीं समझा जाता। पर एक चोर रास्ता है शराब पीकर पीट सकते है और समाज की सहानुभूति भी ले सकते है। बेचारे  ने दारु पी रखी थी। सभ्य समाज में दलित विरोधी और नारी विरोधी गाली देने पर भी जेल हो सकती है। अब    गाली देने के भी चोर दरवाजे है। शराब पीकर दी जा सकती है या फेसबुक पर लिखी जा सकती है। अगर आप फेसबुक पर गाली देते है तो प्रगतिशील तबका बाकायदा आपके पक्ष  व्यंग्य लिख सकता है। वैसे दलित विरोधी और नारी विरोधी दोनों गालियाँ कानूनन जुर्म है शायद। 

बात शराब की थी मैं फिर गालियों पर आ गया। मंत्री जी  ने बियर बार का उद्घाटन किया। मुझे मेरे मित्र धीरेश भाई का स्टेटस सबसे सही लगा। बियर बार के उद्घाटन से कोई दिक्कत नहीं है बशर्ते वो बार सरकारी हो।  आदमी औरत सब सकून से बियर पी सके। कोई बकवास करे तो उसे जेल भेज दिया जाए।  बाकी शराब अगर ख़राब है तो सबके लिए ख़राब है बंद कर देनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं कर सकते तो जो कानून की हद में रहकर पिए , पिए क्या दिक्कत है। वैसे मेरा निजी अनुभव है महफ़िल चाहे हो शराब की हो या बिना शराब की जहाँ आदमी औरत की संख्या बराबर होती है वहाँ का माहौल ज्यादा डेमोक्रेटिक होता है। गालियाँ कम दी जाती है। जिस महफ़िल में औरतो और दलितों की हिस्सेदारी ज्यादा होगी वहाँ उनको ही गाली देना  मुश्किल होगा और चूँकि अपर कास्ट मर्दो की संख्या कम होगी तो ऐसी महफ़िलो के हिंसक होने की सम्भावना भी कम होगी। 

Monday, 29 May 2017

खबरों में लिखा क्या है और जाने हमने पढ़ा क्या है

आज 30 मई का अख़बार मेरे सामने है। अख़बार के नाम में क्या रखा है। खबरों में रखा है। सोचा आपको भी खबरों से रु ब रु करा दूँ। वैसे तो अख़बार आपके पास भी आता ही होगा पर खब्त है लिखने की। अपनी खब्त को समाज सेवा का नाम देना हम भारतीयों की पुरानी अदा है तो मैं क्यों पीछे रहूं। 

अख़बार के सबसे पिछले पन्ने की खबर है एक आर टी आई से पता चला है पिछले 3 सालों में रेलवे ने बिना रेल में यात्रा करवाए भारत की जनता से 8000   करोड़ रूपये वसूल लिए है। व्यापार खून में होने और सीए और गौड़ सारस्वत रेल मंन्त्री होने के साइड इफेक्ट है  कैंसिलेशन चार्जिज बढ़ा देना , विंडो वेटिंग टिकट स्वत् कैंसिल न होना और तमाम तरह की बेईमानियां है जो इस सरकार ने पिछले 3 साल में जनता के साथ की है जिसका नतीजा है 8000 करोड़ की अवैध कमाई । जो लोग व्यापार में ईमानदारी की बात करते है ईमानदार पूंजीवादी व्यबस्था की बात करते है वो बताये ये कहाँ की ईमानदारी है आपने रेल में बैठने तक नही दिया और जनता से 8000 करोड़ रुपये लूट लिए ? इस सरकार को घोटाले की जरुरत क्या है ? 

फ्रंट पेज पर रेवाड़ी कोसली की खबर है एक विवाहिता ने आत्म हत्या कर ली। कारण ? पड़ोस का एक लड़का उसे तंग करता था। शादी के बाद ससुराल तक पहुँच गया था। उससे परेशान होकर लड़की ने फांसी लगा ली। ऐसे सैंकड़ो केस है। कौन इस तरह की मानसिकता को बढ़ावा देता है ? डेमोक्रेसी की इस देश में क्या स्तिथि है वो साफ़ साफ़ दिख रही है। मेरे बहुत से काबिल दोस्त मानते है कि यहाँ सब शोषित है। लड़का भी शोषित है लड़की भी शोषित है। बात उनकी भी गौर करने लायक है।  लड़की लड़के को मना कर देती है लड़का शोषित हो गया। लड़के ने लड़की की फोटोशॉप फोटो फेसबुक पर अपलोड कर दी दोनों शोषित हो गए। लड़की मना नहीं करती तो लड़का क्यों फोटो डालता। लड़की लड़के से प्यार करती है तो लड़के के दोस्त को क्यों मना कर दिया ? लड़के का दोस्त शोषित हो गया। अब लड़के के दोस्त ने सारे गाँव में लड़की के बदचलन की अफवाह फैला दी। तो क्या ग़लत किया ? लड़का लड़की के पड़ोस में रहता था। उससे प्यार करता था फिर भी लड़की की शादी दूसरे गाँव में कर दी। कितना शोषण हुआ लड़के का। लड़के ने बेचारे ने गुस्से में आकर लड़की के ससुराल में बदनामी कर दी। कोई शोषक नहीं है कोई शोषित नहीं है सब शोषक है सब शोषित है। ये मैं कोई व्यंग्य या मजाक में नहीं लिख रहा हूँ। हमारा समाज ऐसे ही सोचता है। इसी को सच मानता है। पिछले दिनों फेसबुक पर मेरी एक दोस्त को एक गुंडे ने गालियों भरे सन्देश भेजे। मेरे बहुत से प्रगतिशील दोस्तों के मन में सवाल थे। उसके पास मेरी दोस्त का नंबर कैसे आया ? मेरी दोस्त ने उससे पहले दोस्ती क्यों की ? अब दोस्ती की तो गालियाँ तो दी ही जा सकती है। बहुत से प्रगतिशील तो गालियों को ग़लत भी कहाँ मानते है। पाद करना और गाली देना एक जैसा है। जिस मोटी  रस्सी से लटककर उस लड़की ने जान दी उसके बारीक़ बारीक़ टुकड़े हम सब बुन रहे थे। अब भी बुन रहे है। हमें कोई खेद भी नहीं है। जिस बॉलीवुड को हम मनोरंजन का खजाना मानते है वो भी उस रस्सी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। " तुम किसी और की हो जाओ ये मैं होने नहीं दूंगा " कैसे लोकतंत्र विरोधी डायलॉग और विचारधाराओ का बॉलीवुड मनोरंजन के नाम पर पालन पोषण करता है ये किसी से छुपा हुआ नहीं है। हजारो लड़कियां अपनी रस्सी की तलाश में है किसी को कोई फ़िक्र नहीं है। अगर कोई लड़की उस लड़की को बेल्ट बनाकर सामने वाले को पीटने की कोशिश करती है तो सारा समाज एक जुट होकर लड़की के खिलाफ खड़ा मिलता है। अपनी भाषा को हथियार बनाकर प्रगतिशील मर्द अपनी जमात के गुंडे को बचाने में लग जाते है। यही हमारे समाज की हकीकत है और यही आइना भी। 


एडिटोरियल पेज पर चंद्रभान प्रसाद जी का एक शानदार लेख है जिसे पढ़कर लगा कि अख़बार के पैसे वसूल हो गए। 

इसके अलावा आखिरी पन्ने पर एक खबर और भी है। ज्यादा फेसबुक करने वाले ज्यादा दुखी होते है ऐसी कोई शोध आई है। बकवास खबर है। 

बाकी सब सरकार की रूटीन एड है। हरियाणा में छात्राओं को पढ़ने के लिए 150 किलोमीटर तक फ्री पास मिलेगा। अब 150 किलोमीटर दूर कौन अप डाउन करेगा ये देखने लायक बात है अगर टर्म्स एंड कंडीशन में झोल नहीं है तो फैसला अच्छा है पर इस सरकार की नीयत को जितना जानता हूँ लगता नहीं झोल नहीं होगा। 

आजके समाचार समाप्त हुए। कल फिर आएगा 

अमोल सरोज स्टेटस वाला