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Sunday, 18 June 2017

सलम्बा गाँव का सपना II - सभ्य समाज और लैट्रिन




हां, तो बात सपने की हो रही थी सपने में मैं स्वच्छ भारत अभियान में बाधा पहुँचाने वाले दुश्मनों की हेकड़ी निकालने उनके गांव सलाम्बा पहुंचा तो देखा वहां तस्वीर वैसी नहीं थी जैसी हकीकत में हमें दिखाई गई थी। सपनों की अपनी तासीर होती है। सपनों को हकीकत से ज्यादा मतलब नहीं होता। वहां इस्लाम जी से बात करने के बाद मैं पानी पीने अयूब के घर पहुंचा तो सपना ऐसा कुछ दिखा रहा था जिस पर सपने में भी विश्वास नहीं हो रहा था।

अयूब एक 25 -26 साल का लड़का है। गुड़गांव, सोहना जाकर मजदूरी करता है। बीवी है बच्चे हैं। कहा जाता है, घर ईंट-पत्थरों से नहीं बीवी-बच्चों से बनता है। पर रहने के लिए तो ईंट-पत्थरों के घर की ही जरुरत होती है। जब मैं अयूब के घर गया तो अयूब के पास सब था पर घर नहीं था। तिरपाल से एक छांया-सी बनाई हुई थी, जिसमें वो अपने परिवार के साथ रहता था। बारिश आने पर तिरपाल टपकता है। रहने सोने के घर पर पक्की छत नहीं है, पर घर के कोने में पक्का बना हुआ लैट्रिन दिखाई दे रहा था। कभी देखा है आपने घर में पक्का लैट्रिन हो और रहने के लिए तिरपाल का सहारा हो ? मैंने जब पूछा ये क्या है, तो अयूब ने बताया कि 20000 कर्जा लेकर ये लैट्रिन बनाना पड़ा। उसका ब्याज चुकाने में दिक्कत हो रही है। पानी की भी दिक्कत है। पर क्या करें?

दिमाग़ हिला देने वाली घटना है। रहने को घर नहीं है, पर कर्ज लेकर लैट्रिन बनवानी पड़ रही है। अयूब अपने भाई के घर भी लेकर गया। घर क्या था, सिर्फ इतनी जगह थी कि दो आदमी सो सकते थे। वहां पांच इंसान रहते हैं। अयूब का भाई भी मज़दूरी करता है। मैं गाँव में गुंडे ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा था, जो लोगों को लूटते हैं। डाकू ढूंढ रहा था जिसके लिए मेवात बदनाम है। पर मुझे मिल मजदूर रहे थे जिनके पास रहने के लिए उतनी जगह भी नहीं थी जितनी जगह में मिडल क्लास के बाथरूम होते हैं।
ये कौन से भारत का निर्माण हम कर रहे हैं ? जहाँ देश के नागरिकों को टट्टी जाने से रोका जा रहा है। टट्टी जाने को हेकड़ी से जोड़ा जा रहा है। अब बात आजादी की रही ही नहीं है। बात ये है कि इंसान टट्टी कर सकता है या नहीं ?
ऐसा दुनिया में पहले किसी सरकार में हुआ है या नहीं इतिहास के जानकार बताएं। गरीबों को टट्टी जाने में डर लग रहा है, कहाँ करें ?
घर में? घर नहीं है तो ?
क्या करें ? रोटी न भी खाए फिर भी टट्टी पेशाब आ ही जाता है, कहाँ करें ?
हुक्मरान कह रहे हैं जो टट्टी करे उसके पिछवाड़े में डंडा घुसा दो।
मुस्कुराइए आप भारत में हैं।
सपने से बाहर आता हूँ तो हकीकत बहुत अलग दिखती है। बड़ा-सा फ़्लैट है हर कमरे के साथ अटैच्ड लैट्रिन-बाथरूम है। बिलकुल समझ नहीं आता कि जब हरेक कमरे से अटैच्ड बाथरूम है तो कोई क्यों खेतों में शौच के लिए जाएगा। क्यों जाएगा वो आपको उस हकीकत में तो नहीं समझ आ सकता जिस हकीकत में आप जी रहे हैं। आप चाहें तो मैं आपको सपनों की दुनिया में लेकर जा सकता हूँ, जहाँ जाकर आपको समझ आएगा। दिल्ली से ज्यादा दूर भी नहीं है वो दुनिया। 

Saturday, 17 June 2017

भारत माता की जय




कल रविवार है। भारत पाकिस्तान के बीच चैम्पियन ट्राफी का फाइनल मैच है। अभी पानी खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। अब किसी तरह का रिस्क लेना मूर्खता की श्रेणी में आएगी। मैं बताना चाहता हूँ कि मैं तन मन (अगर धन होता तो वो भी लगा देता ) से भारत के साथ हूँ। मैं बचपन से ही भारत को जीतना देखता चाहता था। सेन्स ऑफ़ ह्यूमर , हँसी मजाक , व्यंग्य सब अपनी जगह पर जान है तो जहान है। जहान तो भारत पाकिस्तान भी है।  मैं तो जीजस के आगे भारत की जीत के लिए सुबह नारियल भी फोड़ूंगा। नारियल न फोड़ पाया तो अपना सर फोड़ूँगा। मैं तो चाह रहा हूँ कल भारत एक बार नहीं तीन बार जीत जाए। जान बड़ी चीज है भाई।


सहवाग कुछ भी नहीं है मैं बाप दादा के भी आगे जाना चाहता हूँ। भारत पाकिस्तान का पड़दादा है  बल्कि उससे भी कुछ आगे है। देशभक्ति को लोग आसान चीज समझते है इतनी आसान नहीं है आपको अपना दिमाग पाने घुटने से भी नीचे ले जाना पड़ता है। मैं कल से सोच रहा हूँ। भारत बांग्लादेश का दादा है और हमारी माता है ये तो गड़बड़ मामला हो गया। हमारा और बांग्लादेश का रिश्ता क्या कहलाता है। पर देशभक्ति तर्क के आधार पर नहीं लठ के आधार पर चलती है ,  मूर्खता के आधार पर चलती है। हम भारत माता की जय  भी बोलेंगे भारत को पाकिस्तान का बाप भी बोलेंगे। वैसे भी ये बाप बनने का मोह बड़े बड़े प्रगतिशील पत्रकार नहीं छोड़ पाते ये तो सहवाग है। एक फेमस फिल्म का डायलॉग है

रिश्ते में तो हम तुम्हारे बाप लगते है

ये डायलॉग बहुत फेमस है भारत में। अब मैं इस डायलॉग के पीछे की मानसिकता पर गया तो लोग मुझे अतिवादी बोलने लगेंगे। जाने देते है। देशभक्ति के मौसम में अतिवाद नहीं करना चाहिए। कल फादर्स डे पर पाकिस्तान अपने बाप "जो कि हमारी माँ है" को चैम्पियन ट्राफी का तोहफा देगा। दोबारा फिर बताता हूँ। मैं बचपन से ही भारत को जिताना चाहता था। जब तक भारत की टीम क्रिकेट नहीं खेलती है मैं BCCI नामक क्लब की टीम को भी स्पोर्ट करने को तैयार हूँ। कोई दिक्कत नहीं है। वैसे पकिस्तान में कोई अच्छा दिमाग़ का डॉक्टर है तो कल अपने साथ सहवाग को भी लेकर जा सकते है। टीम  से बाहर होने से उनके दिमागी हालत जो बिगड़ी थी आज तक ठीक नहीं हुई है।

मैं फिर भटक रहा हूँ भारत जीतना चाहिए कल। कोहली को गाली देने का मौका भी मिलना चाहिए। हमारा कप्तान कोहली है बांग्लादेश का कप्तान मुर्तज़ा है जो कहता है वो कोई स्टार वतार नहीं है पैसे मिलने पर नाचने वाले कलाकार है। मज़दूर असली स्टार है। उन्होंने 1971 का जिक्र किया। उससे पहले के क्रिकेटर का जिक्र किया जो बांग्लादेश के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुआ था। भारतीय क्रिकेटरों से ऐसी उम्मीद करना बेमानी है। फिर भटक गया।

कल मैं क्लब की टीम का समर्थन करूँगा। जीतने पर विजय माल्या जो पार्टी देगा उसमें भले ही मैं शामिल न हो पाउ पर अपने पैसे किंगफिशर पीकर देशभक्त तो हो ही जाऊँगा। और जान बचेगी वो अलग से। मेरे तो घर में लेट्रीन बाथरूम है तो फ़िलहाल वहाँ भी खतरा नहीं है

बाकी कल जब आप भारत के लिए चीयर करेंगे तो अपने देश के उन नागरिको को भी जरूर याद रखियेगा जिनके लिए शौच एक भारी आफत बना हुआ है। शौच जाती महिलाओ के फोटो खींचे जा रहे है। देश के नागरिक इस बात का विरोध करने पर मारे जा रहे है। और ये सब एक ही देश में एक समय में ही हो रहा है।


जनाब टट्टी कर सकते है क्या

प्रगतिशीलता की क्लास   मैं काफी सालों से क्लास की खिड़की के बाहर खड़ा होकर ले रहा हूँ। कोई अँगूठा माँगने न आ जाए इसलिए दोनों अँगूठे  मैं फेसबुक पर छोड़कर क्लास के बाहर खड़ा होता हूँ। बहुत बार मास्साब ने मेरे अंगूठे लेने की कोशिश की पर भारी नाकामी हासिल हुई। तो गुस्सा में गाली देकर मुझे छोड़ दिया। मैं बदतमीज फिर कान लगाकर खिड़की के बाहर खड़ा हो जाता हूँ।
प्रगतिशीलता की एक क्लास बहुत ज्यादा रोचक थी। उसमें सिखाया गया था कि प्रगतिशील पोस्ट शुरू कैसे की जाए। मासाब बता रहे थे कि अगर सारी फेसबुक किसी मुर्ख नेता के बेवकूफी भरे बयान में उलझी हो तो ये किसी भी प्रगतिशील पोस्ट के लिए एक सुनहरा अवसर है। प्रगतिशील लोगो पर व्यंग्य या ताना मारे बिना शुरू हुई प्रगतिशील पोस्ट उतनी प्रगतिशील नहीं मानी जाती।

आज हर जगह योगी जी की चर्चा है वो लोग जो बहुत सी बातों को व्यर्थ मानते है वो भी उस बयान में व्यंग्य कर रहे है  फ़िलहाल तक ऐसी कोई पोस्ट नजर भी नहीं आयी है जो ये कहती हो कि यहाँ आरएसएस ने फेसबुक को योगी जी के बयान में उलझा दिया वहाँ चोरी छुपे इतना बड़ा काण्ड हो गया। स्टेशन बेच दिए या अलाना फलाना कर दिया गोया सरकार के सबसे बड़ा खतरा फेसबुक ही हो जिसे बरगलाने के लिए उसे षड्यंत्र रचने पड़ते है। गोया योगी अगर हमें इस तरह नहीं बरगलाता तो अब तक तो हमने सरकार की ईंट से ईंट बजा दी होती। खैर अभी तक किसी ने ऐसी पोस्ट नहीं की तो ये श्रेय मुझे मिल जाना चाहिए।

योगी जी को जाने देते है। ठाकुर लोग के मुंह नहीं लगना चाहिए शास्त्रों में लिखा है। हरियाणा में नूंह जिले में डीसी   मणिराम शर्मा स्वच्छ भारत अभियान के पीछे हाथ धो के पड़ गए है। तीन चार दिन पहले सलम्बा गांव के तीन चार लोगो को बाहर शौच करते पकड़ा। डीसी के शब्दों में कहे तो उनकी अकड़ निकाली। जुर्माना किया। डीसी की माने तो सब खाते पीते घर के थे बेवजह खेतो को गन्दा कर रहे थे। मुझे भी गुस्सा आ गया सपने में मैं सालाम्बा गांव पहुँच गया। हरियाणा का वो बदनाम इलाका जहाँ सरकारी लोग जाने से डरते है। गुंडागर्दी है। जान से मार देते है। सपने में जान से जाने का खतरा नहीं रहता तो मैं वहाँ पहुँच गया। मकसद एक ही था  स्वच्छता के दुश्मनो को ललकारना। पर कई बार सपने भी बेकाबू हो जाते है। इससे आगे सपने ने अपनी कहानी खुद गढ़ी।

गाँव के अंदर जाने वाला रास्ता कच्चा है। कीचड़ ही कीचड़। वहाँ कभी सड़क नहीं बनी। अगर जाना है तो कीचड़ में से होकर जाना पड़ेगा। स्वच्छता के दुश्मन इस्लाम नामक बुजुर्ग के घर जाने तक मेरे दोनों पाँव कीचड़  में भर चुके थे। इतना गुस्सा था कि सोचा था अपने पांव उसकी कोठी के कालीन से साफ़ करूँगा। पर जो चीज हकीकत में होती है सपने में नहीं होती। सपने में वहां कोई कोठी नहीं थी। बमुश्किल 30 गज में बना इस्लाम का घर आधा गली की नाली के ऊपर बना था। जैसे ही मैं घर में घुसा घर ख़त्म हो गया। दो छोटे कमरे जिसमे से एक मे तुड़ी रखी थी आदमी बमुश्किल खड़ा हो सके इतना नहानघर , रसोई कही दिखी नही । इतने में 5 परिवार रहते थे । इस्लाम जी खुद उनकी पत्नी और चार शादी शुदा बेटे ।इस्लाम जी बाहर गली में बैठे हुए थे। मैं उनसे स्वच्छता अभियान को गन्दा करने के लिए गालियाँ देने आया था पर उनके  घर तक पहुँचने में मैं खुद गन्दा हो गया था।  मेरी समस्या थी कि खुद कैसे साफ़ होउ। इस्लाम जी से पाँव धोने के लिए पानी  माँगा तो पता चला गांव में पानी की बहुत समस्या है। गांव की गलियों में पानी ज्यादा खड़ा है बनिस्पत घरो के घडो में होने के। बिना पानी स्वच्छ कैसे हो। इस्लाम जी से बात की तो उन्होंने अपना घर दिखा कर हमसे पूछा कि बताओ इसमें कहाँ लेट्रिन बनाये। पुलिस वाली मेडम तो कहती है इस गली वाली नाली के ऊपर बना लो। जो गंदगी खेतों में नहीं कर सकते उसे गांव में अपने घर में कर लो।

मैं सपने में ज्यादा देर रह  नहीं सका। कुछ देर के लिए बाहर आना पड़ा। ये कैसा समय आ गया है सपने से ज्यादा हकीकत में सकून मिलता है। हकीकत में हमने इतने झूठ फरेब भर दिए है कि सपनों को हकीकत दिखाने के लिए मज़बूर होना पड़ा है। सपना मुझे वापिस उस गाँव में लेकर गया जो हरियाणा के उस इलाके में था जहाँ शरीफ लोग जाने से डरते है। जिसमें अधिकतर आबादी मेहनत मजदूरी पर निर्भर थी। जहाँ हरियाणा के किसी भी और गाँव की तरह औरते आदमियों से ज्यादा काम करती थी। एक पोस्ट  में पूरा सपना संभव नहीं है। बाकी सपना अगली पोस्ट में बताता हूँ।

फ़िलहाल डिप्टी जी को फेसबुक पर गरीब मजदूरों की अकड़ निकालंने के लिए बधाई देने जा रहा था पर उन्होंने अपनी पोस्ट डिलीट कर ली। डीसी बहुत बड़ा नाम होता है. हरियाणा में कोई अकड़ता है तो कहा जाता है
"घणा डीसी ना पाके "

उनको पोस्ट डिलीट नहीं करनी चाहिए थी। पोस्ट डिलीट करने से कुछ होता भी नहीं ना। सबके पास स्क्रीन शॉट होते है। अपनी जुबान पर कायम रहना चाहिए। पोस्ट डिलीट करके क्या हासिल होगा

(बाकी अगली पोस्ट में )



Wednesday, 14 June 2017

एक एब्नॉर्मल समाज में नॉर्मल होना अतिवाद है

नॉर्मल शब्द से भारत वालों को फ़िलहाल परहेज रखना चाहिए। अभी उन्हें पता नहीं है नॉर्मल होता क्या है।सामान्य होना किसे कहते है। सामान्य क्या होता है उससे पहले जरा भारत के पिछले इतिहास पर नजर डाल लेते है। ज्यादा पीछे नहीं जायेंगे 
 1947 में भारत देश अंग्रेजो की गिरफ्त से आजाद हुआ उससे पहले 200 साल तक अंग्रेजो ने राज किया। 

औरतों और दलितों के लिए भारत का इतिहास क्या कहता है ?

 पहले औरतो की बात करते है 

1829 में लार्ड विलियम बैंटिक ने सती प्रथा के लिए कानून बनाया। सती प्रथा मतलब पति के मर जाने पर जिन्दा पत्नी को पति की लाश के साथ जला देना। भारत के अपरकास्ट मर्दों को ये बात समझाने के लिए कानून बनाना पड़ा कि ये ग़लत है भाई। ऐसा नहीं होना माँगता 

1848 में सावित्री बाई फुले ने लड़कियों के लिए पहला स्कूल खोला। उससे पहले लड़कियों के लिए स्कूल नहीं था। सावित्री बाई फुले जब स्कूल में जाती थी तो एक एक्स्ट्रा साडी लेकर जाती थी क्योंकि गांव के अपरकास्ट के लोग उसपर गोबर फेंकते थे। क्यों फेंकते थे ? क्योंकि उन्हें लड़कियों को पढ़ाना एब्नॉर्मल लगता था। उन्हें ये बात समझ ही नहीं आती थी कि लड़कियों को क्यों पढ़ना चाहिए। उनका बस चलता  तो आज जितनी लड़कियाँ पढ़ लिख कर अपने पाँव पर खड़ी है वो सब घर के अंदर कैद होती। 

1856 में अंग्रेजो को एक और कानून लाकर भारत के अपरकास्ट मर्दो को बताना पड़ा कि विधवा विवाह नॉर्मल है।  1929 में बाल विवाह पर कानून लाकर बताना पड़ा कि बच्चो की शादी ठीक नहीं है 

भारत आजाद हो गया। भीमराव आंबेडकर हिन्दू कोड बिल लेकर आये। हिन्दू अपरकास्ट मेल संस्थाओ ने विरोध करना शुरू कर दिया।नारे हुए , धरने दिए।  बिल भी पास नहीं हो सका। था क्या उसमे ? महिलाओ  को कुछ नॉर्मल अधिकार दिए थे । महिलाओ को दिए अधिकार हिन्दू धर्म पर हमला थे। 

आज 2017 है मेरा एक दोस्त अमेरिका में रहता है वो बताता है कि वहाँ प्रेग्नेंसी के दौरान ही डॉक्टर बता देते है लड़का होगा या लड़की ताकि पेरेंट्स नाम मनमुताबिक पहले ही तय कर सके। नवजात के आने की तैयारियां उसके कपडे पहले से ही खरीद कर रख सके। भारत में जन्म से पहले जांच कानूनन प्रतिबंधित है। क्यों ? क्योंकि यहाँ लड़की का नाम सुनते ही लोग अबॉर्शन करा लेते है। इसका पढाई लिखाई से कोई लेना देना नहीं है। ये हमारे संस्कार है। 

दलितों पर अत्याचार का लम्बा इतिहास है। जितनी गालियाँ हम देते है वो दलित जातियों के नाम का बिगड़ा स्वरूप है या औरतों के बलात्कार से संबधित है। 1989 में सरकार को कानून बना कर अपर कास्ट मर्दो को बताना पड़ा कि अपने देश के नागरिको को अपमान कर के एक राष्ट्र नहीं बन सकता है। आज भी अपर कास्ट मर्दो को ये नहीं समझाया जा सकता कि गाली क्यों नहीं देनी चाहिए। एक जनाब ने पटना की शान में लिखा है 

" पटना वो जगह है जहाँ ब्राह्मण और दलित एक साथ खैनी खाते है "

ये हाल 2017 का है। ब्राह्मणो का दलितों के साथ खाना खाना 2017 में उदारता , गर्व का विषय है। 

भारत के संस्कार जिस हद तक जड़ है इन्हे लगातार हिलाये बिना , निर्ममता से टोके बिना बात नहीं बनेगी। आज जो नॉर्मल है वो सदियों से लोगो के बिना थके प्रयासों का नतीजा है। बुरा लगना , विरोध करना नयी बात नहीं है। अपरकास्ट मर्दो को अपने अंदर झाँकने की आदत नहीं है ये हमेशा से विरोध ही करते आये है। सबसे बड़ी बात ये है कि अपने अंदर ना झाँकना इनके फायदे का सौदा है। हमारा समाज बहुत अमानवीय रहा है आज भी बहुत सी अमानवीय संस्कार हमारे अंदर है। कोई बात नॉर्मल होने का ये मापदंड नहीं है कि आसपास वाले सब कर रहे है। इन्ही आसपास वालो के लिए सरकार को लिंग जांच बैन करवानी पड़ी है। हम यहाँ तक आये है उसके पीछे जाने कितने लोगो का संघर्ष है। ये संघर्ष लगातार होना बहुत जरुरी है। अतिवाद जैसा कुछ नहीं है ये अपरकास्ट मेल मेंटेलिटी की उपज है। हम आलरेडी अतिवाद में जी रहे है। अंकुश फिल्म का एक सीन है। कुछ नौजवान एक बुजुर्ग के लालच का मजाक उड़ाते है। बुजुर्ग गुस्सा होकर कहता है कि जब ऊपरवाला तुमसे जवाब मांगेगा तब कहाँ जाओगे। इसके जवाब में सब नौजवान गाना गाते है 

ऊपर वाला क्या माँगेगा हमसे कोई जवाब 
भारी पड़ेगा कहंना सुनना हमसे अरे जनाब 
सवाल तो हम पूछेंगे जवाब तो हम मांगेंगे 

वहाँ बुजुर्ग को भगवान से सवाल पूछना अतिवाद लग सकता है क्योंकि उसने अपनी ज़िन्दगी में ऐसा कोई कॉन्सेप्ट सुना ही नहीं होगा। भगवान् से सवाल कैसे हो सकता है।मैं तो भगवान् के आस्तित्व को नहीं मानता हूँ  तो उससे सवाल का तो सवाल ही नहीं उठता।  अपने आसपास बहुत कुछ है जो अतिवाद है।  उसको दूर करना हमारी जिम्मेदारी है  

Tuesday, 13 June 2017

सरकार हमने आपका नमक खाया है।



रेलवे कर्मचारियों की हड़ताल के लिए महान कवि शैलेन्द्र जी ने कविता लिखी थी हर जोर जुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है। उस कविता को गूगल पर सर्च किया तो उसकी शुरुवाती लाइने पढ़ने को मिली। 

हर ज़ोर जुल्म की टक्कर में हड़ताल हमारा नारा है 
मत करो बहाने संकट है , मुद्रा प्रसार इन्फ्लेशन है 
इन बनियों को लूटेरो को क्या सरकारी कंसेशन है ?


एक उर्दू के ग़ज़ब के शायर रहे अकबर इलाहाबादी। अकबर इलाहाबादी जी ने अख़बार का महत्व बताते हुए एक शेर लिखा था 
खींचो न कमानों को ना तलवार निकालो 
जब तोप मुकाबिल हो तो अख़बार निकालो। 

एक हिंदी की सबसे बड़ी हिट फिल्म का सीन है जब विलेन अपने चमचे से पूछता है कि वो उसे गोली क्यों ना मारे तो चमचा कहता है 

"सरकार हमने आपका नमक खाया है 

आज नमक और अख़बार मिलकर हड़ताल से जंग लड़ रहे है। भारत के सभी अख़बार किसके नमक पर ज़िंदा है ये बात कोई छुपी हुई नहीं है। कुत्तों के बाद नमक का हक़ अदा करने में अख़बार सबसे आगे है। बाकी पालतू जीवों को भी अखबारवालों से प्रेरणा लेनी चाहिए। मुझे अख़बार वालों से कोई शिकायत भी नहीं है। जिसकी खावे बाकली उसके गावे गीत। पर चूँकि अख़बार आम आदमी तक जाता है उसकी बेईमानियों को बताना हमारी मजबूरी बन जाता है। 
कल हरियाणा रोडवेज ने हड़ताल की। सभी अख़बार हड़ताल के नुकसानों और जनता की परेशानियों से भरे पड़े है। कभी  कभी लगता है हड़ताल से जनता से ज्यादा परेशान अखबार वाले होते है। हरियाणा रोडवेज को चाहिए था कि अखबार वालों के लिए एक दो बस चला देते। हड़ताल से होने वाले नुकसान का इतना सटीक आंकलन इतनी जल्दी करने वाले अखबारों पर 8 नवंबर से 31 दिसंबर तक ताले लगे थे। नुकसान की रोजाना आंकलन करने वाली इनकी मशीन को जंग लग गया था। 

हरियाणा सरकार निजी बसों को परमिट दे रही है। हरियाणा रोडवेज की सेवाओं के तो दूसरे प्रदेश वाले भी कायल है। निजी क्षेत्र की बसों की लूट से कौन वाकिफ नहीं है। अगर हरियाणा रोडवेज बंद होती है तो उसी जनता को हर रोज कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा इसका अंदाजा अखबार वाले नहीं लगायेंगे , हरियाणा की जनता को लगाना पड़ेगा। हिसार से दिल्ली कभी से प्राइवेट और सरकारी दोनों बस चलती है। हरियाणा रोडवेज की बसों का इतना प्रभाव है कि लोग इन्तजार कर लेंगे पर जाएंगे हरियाणा रोडवेज की बस में ही। 

अख़बार को उनके नमक का हक़ अदा करने दीजिये। रेलवे के स्टेशन बेचे जा रहे हैं  , रोडवेज बेची जा रही है। और देश बेचना किसे कहते है। जनता को ये बात समझने की जरुरत है हड़ताल जनता के लिए ही की जा रही है। सरकारी कर्मचारी कोई दूध के धुले नहीं है वो भी इसी समाज से आये है पर फिर भी निजी क्षेत्र से वो लाख गुना बढ़िया है। अपनी बस , अपने स्कूल , अपने रेल हमें ही बचानी है। अगर इन अख़बार और टीवी वालो के सहारे रहे तो साहिर का ये गाना ही रहेगा गुनगुनाने को बस 

चीन ओ अरब हमारा , हिन्दोस्तां हमारा 
रहने को घर नहीं है सारा जहाँ हमारा 

जो लोग किसानो को अराजक बताकर उनकी आलोचना में लगे है उन्हें भी साहिर सुनने की जरूरत है 

जेबें है अपनी खाली , क्यों देता वरना गाली 
वो संतरी हमारा , वो पासबाँ हमारा। 

साहिर सुनने की सलाह मासूम लोगो को दी गयी है  जिन्हे सच्चाई का सच में पता नहीं है।  जो लोग सरकार के दलाल है या मिडल क्लास है और दलाली उनके  स्वभाव में आ गयी है वो अपने मुंह से गोबर करते रहे। भारत वालों को आदत है। स्वच्छ भारत टैक्स लगा हुआ है तो गोबर करना बनता भी है। उनके लिए मैं नमक हलाल का गाना   छोड़े जा रहा हूँ 

आप अंदर से कुछ और , बाहर से कुछ और नजर आते है। 
बर्खुरदार शक्ल से तो आप चोर नजर आते है 

Monday, 12 June 2017

लेखक खड़ा प्राइम टाइम में , मांगे खुद की खैर।

                                   
(लेखक को रात एक सपना आया। सपने में लेखक एक  बड़े टीवी चैनल के कटघरे में खड़ा था। लेखक के सपने को हु ब हू यहाँ पेश किया जा रहा है )
नॉएडा फिल्म सिटी में कहीं एक सेट बनाया गया है जिसमे एक तरफ जंग का माहौल जगाने की कोशिश है जिसमे भारत के सैनिक पकिस्तान के सैनिको को मारते दिखाए है। असल जंग जैसा लगे इसलिए बाकायदा सैनिको के रूप 20 -30 लोग अभिनय कर रहे है। दूसरी तरफ क्रिकेट मैच का माहौल है। भारत पाकिस्तान का क्रिकेट मैच हो रहा है दर्शक आनंद ले रहे है। इन दोनों के बीच में  तेज तर्रार एंकर खड़ा था एंकर के साइड में मुजरिम की तरह लेखक खड़ा था। अपनी तरह का ये पहला प्राइम टाइम था जिसमे दर्शको , प्लयेर , फौजियों को मिलकर सौ से ज्यादा लोग अभिनय कर रहे थे। अरे चैनल का नाम बताना तो भूल ही गया। चैनल का नाम D टीवी है । कभी डी कम्पनी का राज था अब माहौल बदल चुका है अब डी से दाऊद नहीं देशभक्ति से जाना जाता है। नौ बजने ही वाले है एंकर कभी भी फट सकता है

एंकर - आप सब का देशभक्त टीवी पर स्वागत है। जैसा कि आप सब जानते है कि आज दुश्मन देश पाकिस्तान अपना चैम्पियन ट्रॉफी का सेमीफाइनल जीत चुका है। कल भारत का बांग्लादेश के साथ मुकाबला है। अगर भारत ये मैच जीतता है तो उसे पाकिस्तान के साथ फाइनल  खेलना पड़ेगा। उस पाकिस्तान के साथ जिससे हमारे जवान दिन रात लोहा ले रहे है। जैसा कि आप मेरी दायीं साइड  में देख सकते है कैसे हमारे जवान पाकिस्तान की सेना के नापाक इरादो का हर रोज जवाब देते है। आप बायीं  साइड देखिये कैसे भारत पाकिस्तान के मैच का दर्शक मजा लेते है। क्या हमारे सैनिको के खून की कोई कीमत नहीं है ? क्या एक चैम्पियन ट्राफी देश से बड़ी है। आज का सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या देश के लिए , देश के फौजियों के लिए भारत को बांग्लादेश से हार नहीं जाना चाहिए ? भारत की हार पाकिस्तान के मुंह पर करारा तमाचा होगी। आप इस सवाल का जवाब sms कीजिये

क्या भारत को बांग्लादेश से अपना मैच हार जाना चाहिए
a )  जरूर हार जाना चाहिए   B ) पक्का हार जाना चाहिए
C ) बहुत बड़े अंतर् से हार जाना चाहिए  D ) बड़े नहीं नजदीकी अंतर् से हारना  चाहिए।


आज जब हम यहाँ इस सवाल पर एकमत है कि भारत को पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच नहीं खेलना चाहिए वहीँ भारत में ही कुछ ऐसे लोग भी है जो पाकिस्तान को क्रिकेट में स्पोर्ट करते है उनको चीयर करते है। ऐसे ही एक देशद्रोही से हम आज बात करेंगे। आप जो सोच रहे है कि वो मुसलमान होगा तो बता दूँ हमारे देश में जयचंदो की कमी नहीं है आइये आपको ऐसे ही एक जयचंद से मिलाते है जो स्वघोषित लेखक भी है।

लेखक अमोल सरोज तुम्हारा इस शो में स्वागत मैं नहीं कर सकता। मुझे अपने पर शर्मिन्दिगी हो रही है मैं तुम जैसे आदमी से बात कर रहा हूँ पर देश को तुम्हारी हकीकत से बताना जरुरी है तो तू बता  तू   पाकिस्तान टीम को स्पोर्ट क्यों करता हैं ?

लेखक ,- हमारे खेत का पड़ोसी है भाई । 😂 लव द नेबर । अंग्रेजी का मास्टर बोला। 
एंकर  - वो हमारे दुश्मन हैं हमारे सैनिकों को मारते हैं । तुम्हें शर्म नहीं आती। 
लेखक  - वो पाकिस्तान की सरकार का मामला है पाकिस्तान की सरकार अपने सैनिक भी उतने ही मरवाती है। और सैनिक ही नही अपने नागरिक भी उतने ही मरवाती है । निजाम कहीं का भी निकम्मा हो सकता है । लखनऊ में सीएम को काला झंडा दिखाने पर विद्यार्थियों को जेल हो गयी है । मप्र में किसानों का हाल देख ही रहे हो । चंडीगढ़ में छात्र पिटे। सरकार तो कहीं की भी निकम्मी हो सकती है । किसी किसी देश की सरकार तो अपने देश के नागरिक  को ही जीप के आगे बांध देती है। 
एंकर  - जिस थाली में रोटी खाते हो उसी में छेद करते हो
लेखक  - देशभक्त बाबू  , पाकिस्तान का स्पोर्ट  करने से थाली में छेद नही होता है । मैं तो उस थाली में गोबर न आये इसकी कोशिश कर रहा हूँ । प्यार महोब्बत करने के सिवाय मेरी कोशिश रहती है मैं जहाँ रहता हूँ वहाँ कुछ ऐसा करू कि मेरी ही नही सबकी थाली में कुछ न कुछ रोटी बढ़े । मैंने अपनी ज़िंदगी के 32 साल क्रिकेट मैच में पाकिस्तान से नफरत करके देखा मेरी पड़ोसी की थाली की रोटियाँ कम ही होती गयी । कोई फर्क नही पड़ा । फिर अहसास हुआ ये तो मामला ही गड़बड़ है । क्रिकेट मैच से प्यार करने से तो रोटी नही बढ़ेंगी । बैंगलोर  की टीम विजय माल्या की है माल्या गरीबों की रोटी क्या थाली भी लेकर लंदन भाग गया है। भारत का कप्तान उसकी टीम का भी कप्तान है । रोटी का मसला तो वहाँ है । पाकिस्तान वालों की तो खुद की रोटी पर डाका पड़ा है वो हमारी रोटी क्या छीनेंगे फिर एक ऑटो के पीछे लिखा देखा
हमें तो अपनो ने लूटा गैरों में कहाँ दम था
हमारी किस्ती वहाँ डूबी जहाँ पानी कम था
इस शेर ने आँखे खोल दी भाई । आप भी पाकिस्तान टीम से महोब्बत करो क्योंकि उससे आपके दिल मे नफरत कम होगी । नफरत कम होगी तो हम एक साथ होंगे एक साथ हुए तो रोटी का सवाल भी पूछेंगे । बताओ पूछेंगे कि नही पूछेंगे
एंकर  -  ऐसा ही पाकिस्तान से प्यार है तो पाकिस्तान क्यों नहीं चले जाते। 
लेखक - तकनीकी रूप से ग़लत सवाल है। पूंजीवाद में कोई भी अपनी मर्जी से कहीं नहीं जा सकता। पाकिस्तान एक अलग देश है। वहां जाने के लिए वीजा लगता है। पकिस्तान सरकार मुझे वहाँ क्यों रहने देगी जब मैं जहाँ पैदा हुआ हूँ वहीँ की सरकार को ऐतराज हो रहा है। पाकिस्तान क्या मैं तो उस इंग्लैंड भी जाने को तैयार हूँ जिन्होंने 200 साल भारत का शोषण किया। पाकिस्तान को तो 70 साल ही हुए है। पर मैं इंग्लैंड भी नहीं जा सकता। विजय माल्या और सुभाष चंद्रा इंग्लैंड और पाकिस्तान दोनों जगह जा सकते है। गरीब कहीं नहीं जा सकता। 
एंकर -मैं जो पूछ रहा हूँ उसका जवाब दो तुम बस तुम्हारा पाकिस्तान से क्या रिश्ता है ? क्या तुम कांग्रेसी हो ? 
लेखक - मेरा पाकिस्तान से  पुराना रिश्ता है। जिस धरती पर मैंने जन्म लिया वो पंजाब का हिस्सा थी आधा पंजाब पाकिस्तान में है। हमारी जुबान भी एक थी आज भी हमारी जुबान एक ही है। दुनिया में एक पाकिस्तानी ही ऐसे है जिनसे बात करने के लिए विदेशी जुबान की जरूरत नहीं पड़ती। हमारा बहुत कुछ सांझा है। रही बात कांग्रेस  की तो मैं तो नहीं आपका मालिक जरूर कांग्रेसी था। अब के राज्य सभा में भी कांगेस के विधायकों की मदद से पहुँचा है। मुझे पाकिस्तान क्रिकेट टीम को स्पोर्ट करने से एक नया पैसा नहीं मिलेगा। पर आपके मालिक ने बाकायदा एक चैनल खोलकर पाकिस्तानी सीरियल दिखा दिखा कर करोड़ों रूपये कमायें है पाकिस्तान अभिनेता की  यहाँ भारत में फैन फॉलोइंग बनवाई है। कांग्रेस में जो नेता और बिजनेसमैन हैं उनकी सेहत पर पिछले 3 सालों में  कोई फर्क नहीं पड़ा है। जिंदल वैसे ही तरक्की कर रहा है। उसके भाई को पाकिस्तान भाईचारा बढ़ाने भेजा  जाता है। आप का ये चैनल भी कोई नया नहीं है। कांग्रेस के वक्त का ही है। 

एंकर - अच्छा अब एक देशद्रोही हमारा मुकाबला करेगा। तुम जानते हो मैं कौन हूँ तुम्हारी औकात  नहीं है मुझसे बात करने की। 
लेखक - जी बिलकुल जानता हूँ आप कौन है। आप एक देशभक्त चैनल के देशभक्त एंकर है। मैं देशद्रोही हूँ। आप भारत क्रिकेट टीम को स्पोर्ट करते है मैं पाकिस्तान को स्पोर्ट करता हूँ । आप 2000 के नोट में चिप डलवाते है। मैं चिप वाला 2000 का नोट फाड़कर चिप निकालने की कोशिश करता हूँ और अपने 2000 के रूपये का नुकसान करता हूँ। आप फर्जी विडिओ बनवाते हैं मैं उन फर्जी विडिओ को वाट्सप्प पर शेयर नहीं करता हूँ । आप जिस चैनल पर प्रोग्रम देते है मैं वो चैनल क्या टीवी ही नहीं देखता हूँ । इसके अलावा एक और फर्क भी है आप में और मुझ में 

एंकर (गुस्से में लाल होते हुए )  -क्या 

लेखक -  मैं  कभी तिहाड़ नहीं गया हुआ। 

एंकर - यही हालत रहे तो जल्दी ही चले जाओगे। तुम पाकिस्तान नहीं जा सकते तो इस देश में जी क्यों रहे हो फाँसी तो खा सकते हो 

लेखक  - रस्सी महंगी है
एंकर   - ट्रेन से कट जाओ
लेखक  - स्टेशन बेच दिए प्राइवेट वाले नही कटने देते । पैसे मांगते है
एंकर  - कुए में पड़ जाओ
लेखक - कुए सरकार ने नही छोड़े सब का पानी खराब कर दिया है
एंकर  - गो टू  हेल
लेखक - जी सरकार की पूरी कोशिश है नरक यही बन जाये मैं आलसी हूँ सरकार पर भरोसा करके बैठा हूँ कि कहीं जाना न ही पड़े।


 एंकर  - ये प्रोग्राम बंद करो। कौन लेकर आया इस लेखक को यहाँ। ये वीडियो लेकर जाओ और इसके साथ छेड़छाड़ करके इसे देखने लायक बनाओ और इस लेखक को तिहाड़ भेजने का बंदोबस्त करो।

(तिहाड़ का नाम आते ही लेखक की आँखें खुल गयी और शुक्र  बनाया कि ये सब सपने में हुआ। वैसे शुक्र क्या है ये सब सपने में ही सम्भव है। असलियत में लेखक की इतनी औकात कहाँ है। लेखक परेशान होकर गाना सुनने लगता है।

अपना तो खून पानी , जीना मरना बेमानी
वक्त की हर अदा है अपनी देखी भाली

आपका क्या होगा जनाबे आली।  आपका क्या होगा  )

Saturday, 10 June 2017

सब माया है


आत्मा अजर है अमर है
न कोई मरता है न कोई मारता है
सब माया है
ना जमीन किसी के नाम है
ना किसी के पास काम है
ना कोई खास है न आम है
राजा खामखाह बदनाम है
मुल्क में चैन है आराम है
आगे तो राम का नाम है
ना कोई रोटी खाता है
ना कोई गोली खाता है
ना कोई पेरिस जाता है
ना कोई फाँसी खाता है
जो आता है वो जाता है
कोई भारत भाग्य विधाता है
किसान का बेटा सिपाही है
गोली उसी ने चलाई है
अखबार में खबर आई है
बाप उसका बलवाई है
सरकार ने नरमी दिखाई है
शर्म उनको मगर नही आई है
सब मक़तूल हैं  सब कातिल हैं
सब फर्जी हैं  सब बातिल हैं
भूखे हैं  जो भी नाकाबिल हैं
देशद्रोह में वो ही शामिल हैं
मेरिट में हैं  जो काबिल हैं
काबिल को सब कुछ हासिल है

सब माया है